गांव पीकी निवासी राम सिंह का परिवार अनुसूचित जाति से है और उन्होंने कुछ वर्ष पूर्व अपने परिवार के साथ ईसाई धर्म अपना लिया था। उनके अलावा, गांव के 12 अन्य परिवारों ने भी ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया था। कई परिवारों द्वारा धर्म परिवर्तन करने के कारण समाज के अन्य लोग उनसे नाराज थे।
बृहस्पतिवार रात राम सिंह की पत्नी मामचंदी का निधन हो गया। धर्म परिवर्तन करने के कारण समाज के लोग नाराज थे। इसी नाराजगी का परिणाम था कि मामचंदी की मृत्यु के बाद ग्रामीण उनके घर नहीं गए और न ही उन्होंने गांव के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार करने की अनुमति दी। ग्रामीणों का तर्क था कि यदि उन्होंने ईसाई धर्म अपनाया है, तो उनका अंतिम संस्कार भी उसी धर्म के अनुसार होना चाहिए। उन्हें शव को ईसाइयों के कब्रिस्तान में ले जाना चाहिए।
गांव में बैठी पंचायत में हुआ फैसला
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गांव के रविदास मंदिर में एक पंचायत बुलाई गई। इस पंचायत में अनुसूचित जाति (एसएसी) समाज के लोग शामिल हुए। पंचायत में कुल 13 परिवारों ने भाग लिया, जिन्होंने पूर्व में ईसाई धर्म अपनाया था। काफी विचार-विमर्श के बाद इनमें से 11 परिवारों ने पुनः अपने मूल धर्म में वापसी की घोषणा कर दी। इन 11 परिवारों में करीब 50 लोग हैं। हालांकि, दो परिवारों ने ईसाई धर्म छोड़ने से इनकार कर दिया। धर्म में पुनः वापसी की घोषणा के बाद ही मामचंदी के अंतिम संस्कार पर सहमति बन सकी और श्मशान घाट में अंतिम संस्कार करने की अनुमति दी गई।
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