सहारनपुर। मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय से निकलने वाले दूषित पानी का निस्तारण होगा। इसके लिए विश्वविद्यालय परिसर में एसटीपी का निर्माण किया जा रहा है। पानी को साफ करके ही छोड़ा जाएगा, जिससे कि विश्वविद्यालय से निकलने वाले पानी से ढमोला नदी गंदी न हो। परिसर के पानी की निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है, जिससे जलभराव की समस्या न बने।
विश्वविद्यालय परिसर में भवनों और पार्कों की बनावट ऊंची-नीची है। बीते वर्ष बरसात के दिनों में कुछ जगहों पर पानी रुका था, जिसे देखते हुए पानी की निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है। खास बात यह है कि परिसर में बनने वाले तमाम विभागों, कैंटीन, मैस और छात्रावासों तथा शिक्षकाें और कर्मचारियों के आवासों से इस्तेमाल किया हुआ पानी निकलेगा, जिसे ऐसे ही नदी या नाले में छोड़ा जाना ठीक नहीं है। ऐसे में विश्वविद्यालय अपना एसटीपी तैयार करा रहा है। पूरे परिसर के भवनों का पानी एसटीपी तक पहुंचेगा, जहां पानी को वैज्ञानिक विधि के द्वारा साफ कर छोड़ा जाएगा।
- अभी चल रहा है पहले चरण का निर्माण
विश्वविद्यालय में प्रशासनिक भवन, तमाम विभागों, छात्रावासों, कुलपति आवास, शिक्षकों और कर्मचारियों के आवासों, मूल्यांकन भवन, ऑडिटोरियम, एसटीपी, कंप्यूटर लैब आदि का निर्माण दो चरणों में होना है। पहले चरण के कार्य दो साल से चल रहे हैं, जो अंतिम दौर में हैं। साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने दूसरे चरण के निर्माण कार्यों के लिए भी प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिससे की पहले चरण के कार्य पूर्ण होते ही दूसरे चरण का काम शुरू कराया जा सके।
- पहले चरण के निर्माण कार्य अंतिम दौर में हैं। इनमें एसटीपी भी महत्वपूर्ण है, जिसके जरिए विश्वविद्यालय परिसर से निकलने वाले दूषित पानी को साफ कर छोड़ा जाएगा। साथ ही दूसरे चरण के निर्माण कार्यों को लेकर भी प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही दूसरे चरण के निर्माण कार्य शुरू होंगे। - वीरेंद्र कुमार मौर्य, कुलसचिव, मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय, सहारनपुर।