देवबंद(सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद की ओर से नैनीताल हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिका पर सोमवार को अदालत ने सुनवाई की। जमीयत के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के मुताबिक कोर्ट ने केंद्र सरकार से मामले में जवाब दाखिल करने को कहा था। लेकिन सरकार के अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया है। अब अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी।
मौलाना अरशद मदनी की ओर से सोमवार को जारी बयान में कहा कि संविधान, लोकतंत्र और कानून की सर्वोच्चता को कायम रखने के लिए जमीयत ने इस मामले में अदालत का दरवाजा इस आशा से खटखटाया है कि उन्हें न्याय मिलेगा। मामले में अब तक हुई सुनवाई में जमीयत वकीलों ने अदालत में तर्क रखते हुए कहा था कि किसी भी राज्य सरकार को यूनिफार्म सिविल कोड बनाने या लागू करने का कोई अधिकार नहीं है।
मौलाना मदनी ने कहा कि ऐसा कोई कानून हमें मंजूर नहीं जो शरीयत के खिलाफ हो, मुसलमान हर चीज से समझौता कर सकता है लेकिन अपनी शरीयत और धर्म से समझौता नहीं कर सकता। वर्तमान सरकार यूसीसी एक्ट लाकर मुसलमानों से अधिकार छीन लेना चाहती है।