सहारनपुर के अंबेहटा के चापरचीड़ी गांव में खच्चरों में पाई गई ग्लैंडर्स बीमारी से घोड़ा पालकों में हड़कंप मचा है। शुक्रवार को गांव में पहुंची पशुपालन विभाग के चिकित्सकों की टीम ने दो खच्चरों को इंजेक्शन देकर मौत की नींद सुला दिया।
साथ ही टीम ने लोगों को अन्य घोड़ों की भी जांच कराने के लिए कहा। इसके अलावा बाहर से आने वाले घोडे़ खच्चरों पर रोक लगा दी गई है। बता दें कि गांव चापरचीड़ी निवासी शोभाराम पुत्र संता के दो खच्चरों की एक माह पूर्व मौत हो गई।
इसके बाद कुछ दिन पूर्व शोभाराम ने अपने दो और खच्चरों में उसी तरह की बीमारी के लक्षण देखे और इसकी सूचना फंदपुरी स्थित पशु चिकित्सालय में पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मनीष वर्मा को दी, जिसके बाद पशु चिकित्सकों की एक टीम गांव पहुंची थी
और बीमार खच्चरों के रक्त के नमूने लेकर जांच के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार भेजे थे। जांच में दोनों खच्चरों में खतरनाक ग्लैंडर्स नाम की लाइलाज बीमारी होने की पुष्टि हुई।
इससे पशु पालन विभाग की एक टीम मुख्य पशु चिकित्साधिकारी सहारनपुर डॉ. आर बी सिंह के नेतृत्व में बृहस्पतिवार को चापरचीड़ी गांव पहुंची। टीम ने पीड़ित दोनों खच्चरों को गांव से दूर ले जाकर उन्हें पूरी सावधानी के साथ इंजेक्शन देकर मौत की नींद सुला दिया।
इसके बाद उन्हें गहरा गड्ढा खुदवाकर उसमें दफन कराया। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरबी सिंह ने बताया कि चार माह पूर्व पुंवारका ब्लाक के देवला गांव में भी दो खच्चरों में इस बीमारी के लक्षण पाए जाने पर इसी तरह की प्रक्रिया प्रयोग में लाई गई थी।
उन्होंने बताया कि मारे जाने वाले खच्चरों का उचित मुआवजा उनके मालिक को दिए जाने का प्रावधान है। उन्होंने चापरचीड़ी गांव सहित पांच किमी के दायरे के सभी घोड़ों और खच्चरों के रक्त के नमूने लेकर उनकी जांच कराए जाने की बात कहीं है।
इसके अलावा बाहर से आने वाले पशुओं पर रोक लगा दी गई है। टीम में नोडल अधिकारी डॉ. विकास कुमार, डॉ. धर्मेंद्र कुमार, डॉ. विनित कुमार, डॉ. मनीष वर्मा आदि शामिल रहे। इस दौरान ग्राम प्रधान रमेशचंद, डॉ. निर्देश कुमार, संजीव सैनी, शोभाराम, मोहन सिह, जयपाल, नरेश कुमार, संजय आदि की मौजूदगी रही।