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शहीद बिंदरपाल सिंह की पुण्य तिथि पर किया नमन

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साढ़ौली कदीम (सहारनपुर)। कारगिल युद्ध में अपने प्राण न्यौछावर करने वाले क्षेत्र के अमर सपूत शहीद बिंदर पाल सिंह के शहीदी दिवस पर परिजनों और ग्रामीणों ने नम आंखों से उन्हें याद कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। शहीद बिंदर पाल सिंह की पुण्यतिथि पर गांव में बनी उनकी समाधि पर परिजन व क्षेत्रवासियों ने तिरंगा चढ़ा प्रतिमा पर पुष्प मालाएं अर्पित कर उन्हें नमन किया। ग्रामीणों ने शहीद बिंदर पाल सिंह अमर रहे के नारे लगाए। इस अवसर पर शहीद के पिता चौ. रणजीत सिंह, भाई मगन पाल सिंह, पूर्व प्रधानाचार्य नाथी राम कांबोज, प्रधान राजेश पंवार, चौ. रामपाल सिंह, बुद्ध सिंह काम्बोज, सोनू पंवार, मेजपाल आर्य, जुगतार सिंह, सतीश शर्मा, श्याम सिंह, गोवर्धन, ध्यान सिंह आदि मौजूद रहे।
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शादी के एक साल बाद ही शहीद हो गए थे बिंदर पाल
शहीद बिंदर पाल सिंह का जन्म ब्लाक साढ़ौली कदीम के यमुना तटवर्ती गांव बहरामपुर के एक साधारण किसान परिवार में एक जनवरी 1976 को हुआ। जन्म के मात्र तीन माह बाद बिंदर पाल सिंह की मां बिशम्बरी देवी उन्हें छोड़कर परलोक सिधार गई थी। उनकी परवरिश पिता रणजीत सिंह व बड़े भाई मगन पाल सिंह ने की। इंटर के बाद बिंदर पाल सिंह मेरठ छावनी से भारतीय थल सेना की 27 राजपूत बटालियन में भर्ती हुए। वर्ष 1998 में बिंदर पाल की शादी जनपद मुजफ्फरनगर के गांव रसूलपुर निवासी भोपाल सिंह की पुत्री पूनम से हुई। भारत पाकिस्तान के बीच चले कारगिल युद्ध के दौरान 17 जून 1999 को बिंदर पाल सिंह को कारगिल के पुंछ सेक्टर में मातृभूमि की रक्षा के लिए भेजा गया। वहां दुश्मनों से लोहा लेते हुए 29 जून 1999 को देश का यह लाल मातृभूमि की रक्षा के लिए बलिदान दे गया।
शहीद के सम्मान से जुड़ी मांगों की अनदेखी पर जताई पीड़ा
शहीद के पिता चौ. रणजीत सिंह ने बताया कि गन्देवड चिलकाना मार्ग से उनके गांव को जोड़ने वाले रास्ते पर शहीद के नाम से द्वार का निर्माण कराने, गांव में शहीद के नाम पर इंटर कॉलेज की स्थापना की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। गांव में शहीद के नाम से संचालित उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा के लगातार गिरते स्तर पर उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि शहीद के पुण्यतिथि कार्यक्रम में एक भी अध्यापक नहीं पहुंचा, न ही परिसर की कई माह से साफ सफाई कराई गई।
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