सहारनपुर। खेतों की मेड़ से अंतरराष्ट्रीय ट्रैक तक का सफर तय करने वाली प्राची चौधरी को लखनऊ में पुरस्कृत किया गया है। उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से सम्मानित किया है। इससे पहले सरकार उन्हें जिला युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल अधिकारी के पद भी नियुक्त कर चुकी है। इसकी प्रक्रिया भी जारी है। वह पेरिस ओलंपिक में भी भाग ले चुकी है।
प्राची ने गांव से निकलकर एशियन गेम्स में भारत का परचम लहराने तक दिन-रात मेहनत की। जिले के गांव झबीरण में साल 1996 में किसान जयवीर सिंह के यहां जन्मी प्राची अपने भाई बहनों में तीसरे नंबर की है। उनके बड़े भाई अंकित व छोटा भाई प्रियांशु है। अंकित की शादी हो चुकी है और वह प्राइवेट कंपनी में कार्य करते हैं। साथ ही अपना बिजनेस भी करते हैं। एक छोटा भाई प्रियांशु है। उनकी छोटी बहन अन्नू यूपी पुलिस में तैनात है। प्राची ने साल 2012 में इंटर की परीक्षा सरसावा के इंटर कालेज से पास की है। उनका प्रवेश पटियाला की यूनिवर्सिटी में हुआ। जहां उन्होंने दौड़ में टॉप करते हुए एनआईएस पटियाला में जगह बनाई। वहीं से उन्होंने अपनी प्रैक्टिस शुरू की। मंगलवार को प्राची चौधरी को लखनऊ में रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
- एशियन गेम्स में जीत चुकी हैं सिल्वर मेडल
वर्ष 2023 में हुए एशियन गेम्स में प्राची की टीम ने सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रचा था। उन्होंने चार गुना चार सौ मीटर दौड़ में हिस्सा लिया था। उनकी टीम मात्र 0.2 सेकेंड से स्वर्ण पदक हासिल करने से चूक गई थी। प्राची रेलवे की 400 मीटर दौड़ में रिकॉर्डधारी है। उन्होंने चार सौ मीटर की दौड़ मात्र 52.09 सेकेंड में पूरी की थी। प्राची साल 2018 में आयोजित हुए एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाई थी। लेकिन, इसके बाद उन्होंने साल 2018 में दोहा में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल हासिल किया था, जबकि नेशनल गेम्स में तीसरा स्थान हासिल किया था। प्राची फिलहाल त्रिवेंद्र में रहकर आगामी एशियन और कॉमनवेल्थ खेलों की तैयारी कर रही है। उनके पुरस्कृत होने पर उनके चाचा सचिन आदि ने खुशी जाहिर की है।