सहारनपुर। अंबाला-देहरादून हाईवे पर बना सहारनपुर बाईपास शुरू हुए करीब एक साल होने जा रहा है। इस हाईवे पर दो जगह टोल टैक्स वसूला जाता है, लेकिन यहां से गुजरने वालों को सुविधाओं के नाम पर दुश्वारियां मिल रहीं हैं। कई जगह सड़क पर गहरे गड्ढे हो गए हैं, जिस कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
अंबाला-देहरादून नेशनल हाईवे 344 के तहत सरसावा से गागलहेड़ी तक सहारनपुर बाईपास बनाया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इसका निर्माण कराया है। इस हाईवे पर एक तरफ सरसावा क्षेत्र के शाहजहांपुर में तो देहरादून की तरफ चमारीखेड़ा में टोल टैक्स है। इस तरह हाईवे से गुजरने वाले वाहनों से जिले में दो जगह टोल टैक्स वसूला जाता है।
इस हाईवे पर सितंबर 2020 के अंतिम सप्ताह में वाहनों की आवाजाही शुरू हुई थी। तब से इसके निर्माण और अव्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठते आ रहे हैं। गंगोह रोड पर फ्लाईओवर की दीवार के पैनल जगह छोड़ने लगे थे और बोल्ट लगाकर पैनल को रोका गया था।
अब सड़क की हालत भी खराब होने लगी है। बाईपास से लाखनौर की तरफ उतरने वाली साइड पटरी में तो दो से ढाई फीट तक गहरा गड्ढा हो चुका है। जिन लोगों को नागल की तरफ से बाईपास पर जाने और बाईपास से नागल अथवा मुजफ्फरनगर की तरफ निकलने वाले वाहन इसी साइड पटरी का इस्तेमाल करते हैं। भारी वाहनों का आवागमन भी होता है। चूंकि साइड पटरी वन वे नहीं है, ऐसे में सामने से आते वाहन को बचाने के चक्कर में हादसा होने का खतरा बना हुआ है। क्योंकि गड्ढ़ा ज्यादा गहरा होने के साथ ही बराबर में गहराई में खेत हैं और साइड की दीवार भी महज दो से ढाई फीट ऊंची है। ऐसे ही अन्य भी कई जगह पर सड़क में गड्ढे हो गए हैं, जो बरसात में और गहरे होते जा रहे हैं।
43 किमी का है पूरा प्रोजेक्ट
निर्माण, परिचालन, हस्तांतरण (बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर बीओटी) पर आधारित गागलहेड़ी से यमुनानगर तक करीब 43 किलोमीटर लंबाई के मार्ग का निर्माण हुआ है, जिसको हाईवे 344 का नाम दिया गया है। निर्माण कार्य 2018 में शुरू हुआ था।
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बीओटी के तहत 15 साल तक इस प्रोजेक्ट पर मरम्मत कार्य की जिम्मेदारी निर्माण एजेंसी की ही है। जो कमियां हैं, उन्हें दूर कराया जा रहा है। -- प्रदीप गोसाईं, प्रोजेक्ट मैनेजर, एनएचएआई