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बुखार बना काल, सरकारी अस्पतालों में ओपीडी बंद

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देवबंद/छुटमलपुर/ रामपुर मनिहारान/ बड़गांव (सहारनपुर)। जिले में कोरोना संक्रमण के साथ ही बुखार भी लोगों की जान ले रहा है। कोरोना संक्रमण का हवाला देकर सभी पीएचसी और सीएचसी पर ओपीडी बंद हैं। अब स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है। मरीजों को अपनी जान बचाने के लिए प्राइवेट चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ रहा है। इनमें भी ज्यादातर गरीब लोग महंगा उपचार न करा पाने के कारण दम तोड़ रहे हैं।
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देवबंद क्षेत्र के इस्लमाइलपुर में चार, भायला कलां में 20, अंबहेटा शेखां में 10 तथा रणखंडी में भी कई लोगों की बुखार से मौत हो चुकी है। सीएचसी के अधीक्षक डा. इंद्राज सिंह ने बताया कि अस्पतालों में वैक्सीनेशन और कोविड टेस्ट के चलते ओपीडी सेवा बंद पड़ी है। केवल दो चिकित्सकों की तैनाती होने के चलते इमरजेंसी भी नहीं चल पा रही है।
नागल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. विकास पाल ने बताया कि स्वास्थ्य टीम गांव गांव में जाकर सर्वे कर रही है। बुखार या कोरोना जैसे लक्षण दिखने पर मरीजों को कोविड-किट उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि गांव पनियाली, बढेडी कोली, रसूलपुर खेड़ी और दंघेडा में एक-एक व्यक्ति की बुखार से मौत हुई है।
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छुटमलपुर क्षेत्र के खुजनावर में बुखार से एक माह में तीस, दतौली मुगल में एक सप्ताह में नौ, सुंदरपुर में दस तथा छुटमलपुर में आधा दर्जन से ज्यादा लोग मर चुके हैं। फतेहपुर सीएचसी में कोविड-19 अस्पताल बनाने के चलते इस क्षेत्र के रोगियों को इमरजेंसी के लिए भी भटकना पड़ रहा है। इसके अलावा साढ़ौली कदीम सीएचसी, बेहट सीएचसी, बिहारीगढ़ पीएचसी, मुजफ्फराबाद पीएचसी पर भी केवल इमरजेंसी ही देखी जा रही हैं। उसमें भी पहले कोविड की रिपोर्ट मांगी जाती है। मुजफ्फराबाद के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा देशराज का कहना हैं कि जहां से सूचना मिलती है टीम भेज कर जांच करा दवाई बंटवाई जा रही है।
रामपुर मनिहारान क्षेत्र में बीते दस दिन के अंतराल से रामपुर मनिहारान, चकवाली, कुंदनगढ़ में बुखार से आधा दर्जन से ज्यादा मौतें हुई हैं। सीएचसी में तेज बुखार के रोगी को भरती करने की कोई सुविधा नहीं है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजीत राठी का कहना है कि बुखार व वायरल, खांसी, जुकाम से पीड़ित रोगियों की जांच कर उन्हें दवाई दी जा रही है।
बड़गांव के जड़ौदा पांडा में बुखार से 12, दल्हेडी में दस, बड़गांव में 12, शिमलाना में आठ, सिरसली में 11, अंबेहटा में नौ लोग अकाल मौत का शिकार हो चुके हैं। यहां पीएचसी केवल फार्मासिस्ट के भरोसे चल रही है। निजी चिकित्सक डा वीके शर्मा और डा नन्दलाल चौहान बताते हैं कि उनके पास सर्वाधिक रोगी बुखार के ही आ रहे हैं।
बुखार से युवक की मौत
तीतरो। ग्राम चंदपुरा में बुखार से 30 वर्षीय महताब की मौत हो गई। उसको करीब एक सप्ताह से लगातार बुखार आ रहा था। परिजनों ने बताया कि उसका गंगोह निजी चिकित्सक के यहां से इलाज चल रहा था। शुक्रवार देर शाम युवक की मौत हो गई। गांव में दो दिन पूर्व भी एक अधेड़ की बुखार से मौत हो गई थी। ग्राम प्रधान वाजिद अली का कहना है कि गांव में दर्जनों लोग बुखार की चपेट में हैं।
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