विदेशी जमातियों पर कसा शिकंजा, चार्जशीट दाखिल
सहारनपुर। लॉकडाउन का उल्लंघन करने, टूरिस्ट वीजा के नियमों का दुरुपयोग कर धार्मिक प्रचार करने और कोरोना संक्रमण काल में लापरवाही बरतने जैसे आरोपों में नामजद 57 विदेशी जमातियों पर अब कोर्ट में मुकदमे चलेंगे। इनके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है।
कोरोना संक्रमण में तब्लीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद की भूमिका सामने आने के बाद लॉकडाउन के बीच ही सर्च आपरेशन चलाया गया था। सर्च आपरेशन के बाद अप्रैल के महीने में शहर के थाना मंडी, कोतवाली देहात, देवबंद और थाना कुतुबशेर में कुल छह केस दर्ज किए गए थे। इनमें विदेशी सहित 82 जमातियों को नामजद किया गया था। इनमें अकेले थाना मंडी में तीन केस दर्ज कर 27 विदेशी जमातियों को नामजद किया गया था। सर्च आपरेशन में चिह्नित करने के बाद 21 अप्रैल को शासन के निर्देश पर उन्हें अस्थायी जेल में भेजा गया था। बाद में कुछ जमातियों को छोड़ दिया था, जिसमें अधिकतर भारत के निवासी थे। जेल में बंद जमातियों में सबसे अधिक संख्या किर्गिस्तान और इंडोनेशिया के नागरिकों की है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद 57 के खिलाफ अब कोर्ट में मुकदमे चलेंगे। इसके साथ ही इन जमातियों की ओर से जमानत के प्रयास भी शुरू कर दिए गए हैं। एसएसपी दिनेश कुमार ने बताया कि विदेशी जमातियों के मामलों में पहले से ही विवेचना जारी थी। अब इनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कराई गई है। अब आगे इनके मुकदमों की सुनवाई कोर्ट में चलेगी। जमीयत उलमा ए हिंद सहित अन्य संगठनों की ओर से लगातार विदेशी जमातियों पर चार्जशीट दाखिल करने और फिर उन्हें स्वदेश भिजवाने का दबाव बनाया जा रहा था।
कई देशों के जमाती हैं शामिल
- वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. विरेश राज शर्मा ने बताया कि यहां किर्गिस्तान से 21, इंडोनेशिया से 19, मोरक्को से एक, माले से एक, मलेशिया से दो, थाईलैंड से चार, फिलिस्तीन से एक, सीरिया से एक, सऊदी अरब से एक, सुडान से पांच और फ्रांस से एक जमाती है। कोर्ट में केस चलने के बाद जमातियों की ओर से जमानत के प्रयास किए जाएंगे।
अपराधियों जैसा व्यवहार न करने की अपील
सहारनपुर। विदेशी जमातियों के मामले में सांसद हाजी फजलुर्रहमान, वरिष्ठ अधिवक्ता जानिसार, सांसद प्रतिनिधि ओसाफ गुड्डू, मिल्ली कौंसिल के जिलाध्यक्ष अब्दुल मलिक मुगीसी, अनवार अहमद, बाबू अहतशाम सहित अन्य लोग एसएसपी दिनेश कुमार सहित अन्य अफसरों से मिले। इनकी ओर से अपील की गई कि इन जमातियों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार न किया जाए। न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उन्हें अनावश्यक रूप से कोई परेशानी न हो।