सहारनपुर में देर से ही सही एक बार फिर विकास प्राधिकरण ने शनिवार को तीन अवैध कालोनियों में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। प्राधिकरण के महाबली ने अवैध कालोनियों की सड़कों और बाउंड्री को तहस-नहस कर दिया।
इसके अलावा उन्होंने लंबे समय से लंबित मामले में वी-मार्ट की बिल्डिंग को भी सील किया। हालांकि इसमें बिल्डिंग के अवैध निर्माण वाले हिस्से के ध्वस्तीकरण के आदेश हैं।
शहर में लगातार अवैध कालोनियों की बाढ़ सी आई हुई है। मल्हीपुर रोड, नवादा रोड, पेपर मिल रोड, बेहट रोड, जनता रोड और चिलकाना रोड पर अवैध कालोनियों की भरमार है। कालोनाइजर प्राधिकरण के अधिकारियों से मिलीभगत कर अवैध कालोनियों का काम धड़ल्ले से चला रहे हैं।
प्राधिकरण कागजी कार्रवाई कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर रहा है। शनिवार को प्राधिकरण ने लंबे समय बाद अवैध कालोनियों की सुध ली। पैरामाउंट टयूलिप के पीछे नवादा रोड पर विकसित की जा रही गोकुलधाम कालोनी, इंद्रपाल कालोनी और किसी सैनी द्वारा बेची जा रही एक अज्ञात कालोनी में विकास प्राधिकरण के महाबली ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
विकास प्राधिकरण के सहायक अभियंता अनिल माथुर ने बताया कि इन तीनों कालोनियों को काफी समय से नक्शा पास कराने के लिए नोटिस दिए जा रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने मानचित्र पास नहीं कराया।
इस पर शनिवार को इन अवैध कालोनियों में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। इस दौरान सहायक अभियंता एनपी सिंह, अवर अभियंता सुधीर गुप्ता, प्राधिकरण फील्ड स्टाफ मौजूद रहा।
अतिक्रमण हटाओ अभियान में जिन लोगों की अस्थाई दुकानें ध्वस्त की गई हैं उनमें नगर निगम के रवैये को लेकर रोष है। उनका कहना है कि बेशक वह अवैध रूप से सड़क पर दुकानें चला रहे हैं। मगर वह गरीब लोग हैं।
अतिक्रमण हटाने के रूप में उनकी रोजगार तो छिन ही गया है। साथ ही उनकी तिरपाल और छप्पर आदि भी नष्ट कर दिए गए हैं। यदि उनको एक या दो दिन पहले दुकानें हटाने की चेतावनी दी जाती तो उनका सामान नष्ट होने से बच जाता।
वी-मार्ट की बिल्डिंग सील की
विकास प्राधिकरण की टीम ने शनिवार को लंबे समय से लंबित वी मार्ट की बिल्डिंग को सील कर दिया। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष वेदप्रकाश सिंह ने बताया कि इस बिल्डिंग के कुछ हिस्से का मानचित्र आवासीय में पास कराकर व्यवसायिक निर्माण किया हुआ है।
इसके अलावा इसका एरिया भी बढ़ा हुआ है। कमिश्नर के ध्वस्तीकरण के आदेश पर कार्रवाई करते हुए इस बिल्डिंग को पहले चरण में सील किया गया है। जल्द ही अगली कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली रोड पर सड़क किनारे ढाबे और चाय की दुकान चलाने वाले लगभग सभी लोग बेहद गरीब हैं। यही वजह है कि नगर निगम ने पुलिस को साथ लेकर आसानी से उनकी अस्थाई दुकानें ध्वस्त कर दी।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि नगर निगम पुराने शहर और बाजारों से अतिक्रमण हटाने में ऐसी हिम्मत क्यों नहीं दिखाता। पिछले दिनों आवास विकास से अतिक्रमण हटाने पहुंची नगर निगम की टीम केवल दो दुकानदारों के विरोध की वजह से बैरंग लौट गई थी।
पुुराने शहर की लगभग भी सड़कों पर अतिक्रमण है, जिसकी वजह से राहगीरों को निकलने में परेशानी रहती है। निगम को चाहिए कि जनहित में वहां से भी अतिक्रमण हटाए।