सहारनपुर। कुल 200.22 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे दिल्ली-यमुनोत्री फोरलेन बाईपास पर बनने वाले तीन पुलों का 234 करोड़ रुपये का प्रस्ताव मंजूर नहीं हो पा रहा है। तीसरी बार फिर से शासन की तरफ से आपत्ति जताने के बाद अब विभाग ने चौथी बार संशोधित प्रस्ताव भेजा है, जिसे मंजूरी के लिए कैबिनेट में रखा जाएगा।
दिल्ली-यमुनोत्री फोरलेन बाईपास के पहले चरण का कार्य चुन्हेटी फाटक से अंबाला रोड और चिलकाना रोड को क्रॉस करते हुए बेहट रोड स्थित देवला तक कराया जा रहा है। कुल 19.30 किलोमीटर लंबे इस फोरलेन बाईपास के 11 किलोमीटर का काम पूरा कर लिया गया है, जो करीब 70 फीसदी बैठता है। बीच में तीन जगह जमीनी विवाद के चलते काम लटका हुआ है। मार्च में 14 किलोमीटर काम पूरा कर लेने का लक्ष्य रखा गया है और जून-जुलाई तक शत प्रतिशत, लेकिन फिलहाल बाईपास पर बनने वाले तीन पुलों का पेच फंसा हुआ है।
दरअसल, बाईपास के बीच में दो जगह पूर्वी यमुना नहर आ रही है, जिस पर करीब 60-60 मीटर के दो पुल बनाए जाने हैं। इनके अलावा अंबाला रोड और उसी के साथ चल रही रेलवे लाइन के ऊपर ओवरब्रिज बनाया जाना है।
इन तीन पुलों के लिए सेतु निगम वर्ष 2022 से अभी तक दो बार प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज चुका है, लेकिन हर बार आपत्ति जता दी जाती है, क्योंकि 234 करोड़ रुपये का प्रस्ताव सामान्य नहीं है। अब तीसरी बार प्रस्ताव भेजा गया, उस पर भी आपत्ति लग गई। मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष पहुंचा, जो लोक निर्माण विभाग के मंत्री भी हैं। उन्होंने पुलों के प्रस्ताव को बाईपास के खर्च के साथ संशोधित कर भेजने को कहा है। हालांकि लोक निर्माण विभाग ने आनन-फानन में चौथी बार प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया है। अब वह अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट के समक्ष जाएगा।
n लोक निर्माण विभाग के हिस्से में 16.700 किलोमीटर रोड : कुल 19.300 किलोमीटर फोरलेन बाईपास में लोक निर्माण विभाग को 16.700 किलोमीटर फोरलेन सड़क बनानी है।
बाकी 2.600 किलोमीटर में पुलों का निर्माण होना है, जो सेतु निगम को बनाने हैं। लोक निर्माण विभाग ने अपने हिस्से का कार्य सभी बाधाओं को पार करते हुए जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।