सहारनपुर। गणित ऐसा विषय है, जिसमें यूपी बोर्ड के सबसे अधिक विद्यार्थी फेल होते हैं। विषय विशेषज्ञों का कहना है कि यही ऐसा विषय है, जिसमें रुचि ली जाए तो शत प्रतिशत अंक लाए जा सकते हैं। बावजूद गणित का हौवा छात्र छात्राओं पर भारी पड़ रहा है। यूपी बोर्ड में विद्यार्थियों के गणित विषय में पिछड़ने की एक बड़ी वजह शिक्षकों की भारी कमी भी है।
जानकर हैरानी होगी कि जनपद के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में गणित विषय के शिक्षकों के 50 से 60 फीसदी पद खाली हैं। वर्तमान में जनपद में राजकीय हाई स्कूल और इंटर कॉलेजों की संख्या 56 है। इनमें गणित विषय के शिक्षकों के 50 पद स्वीकृत हैं, 22 पद ही भरे हुए हैं, जबकि 28 पद खाली हैं। उधर, परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भी गणित विषय के पद खाली चल रहे हैं। विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार एसटी के चार, ओबीसी के चार, एससी के तीन और सामान्य वर्ग का एक पद खाली पड़ा है।
------ विषय विशेषज्ञों की बात...
गणित विषय सबसे बड़ा होव्वा
एसएएम इंटर कॉलेज में गणित के शिक्षक सुधीर शर्मा ने बताया ज्यादातर छात्र गणित को हौवा बना रखे हैं। जबकि यह भ्रम है। जो छात्र सूत्रों को याद कर लेता है वह शत प्रतिशत तक अंक ले आता है, मगर ऐसे छात्रों की संख्या 15 से 20 फीसदी ही रहती है। 50 फीसदी से अधिक छात्र गणित विषय में फर्स्ट डिविजन तक नहीं ला पाते हैं।
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बेसिक कमजोर होना बड़ी वजह
बीडी बाजोरिया इंटर कॉलेज के गणित विषय के शिक्षक कर्मवीर गुप्ता का मानना है कि जिन छात्रों ने गणित विषय में प्राथमिक स्तर से मेहनत की हो उन्हें भविष्य में भी परेशानी नहीं आती है।
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कमजोर मिला था बच्चों का स्तर
परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बीते वर्ष लर्निंग आउटकम के माध्यम से बच्चों का भाषाई और गणित ज्ञान परखा गया था। इसमें बच्चों से कुछ चुनिंदा सवाल पूछे गए थे, जिनके आधार पर ग्रेड निर्धारित किए गए थे। विभागीय सूत्रों के मुताबिक 60 फीसदी बच्चे अंकों को जोड़ने हऔर घटाने में नाकाम साबित हुए थे।