बेहट। रूस-यूक्रेन और इस्राइल-हमास युद्ध की मार जनपद के आयरन हैंडीक्राफ्ट उद्योग पर पड़ रही है। इसके चलते आयरन हैंडीक्राफ्ट का निर्यात घट गया है। इससे उद्यमियों, हस्तशिल्पियों से लेकर निर्यातकों तक में बेचैनी है।
जनपद के छोटे से कस्बे बेहट को देश और दुनिया में पहचान दिलाने वाला आयरन हैंडीक्राफ्ट की विश्व के कई देशों में खासी मांग है। यहां के लोहे और लकड़ी से बने हैंडीक्राफ्ट उत्पादों विंड चाइम, बाबू बेल, कैंडल स्टैंड, साइकिल, शॉपिंग बोर्ड, बाउल आदि का स्पेन, जर्मनी, नीदरलैंड, इटली, फ्रांस, दक्षिणी अफ्रीका, अमेरिका, रूस एवं यूक्रेन आदि देशों में 200 से 250 करोड़ रुपये का सालाना निर्यात होता है। इनमें सबसे अधिक निर्यात यूरोपीय देशों और अमेरिका में हो रहा है। कुछ उत्पादों में लोहे और लकड़ी के अलावा जूट एवं एल्युमिनियम का भी प्रयोग किया जाता है।
बेहट में आयरन हैंडीक्राफ्ट की छोटी बड़ी 30 से 35 इकाइयां हैं। पहले सरकार की तरफ से कारोबारियों को अनुदान सहित अन्य सुविधाएं मिलती थीं। इसके बंद होने से आयरन हैंडीक्राफ्ट उत्पाद महंगे हो गए, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले निर्यात पर पड़ा है। अब रूस-यूक्रेन और इस्राइल-हमास युद्ध और अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद से इसका निर्यात में 60 फीसदी तक घट गया है।