सहारनपुर एटीएस पुलिस द्वारा पकड़ा गया आतंकी नजीर अहमद वानी उर्फ मुस्तफा
सहारनपुर। 30 साल बाद एटीएस के हत्थे चढ़े आतंकी नजीज अहमद वानी से पूछताछ में अहम जानकारी सामने आई है। वर्ष 1994 में जमानत मिलने के बाद फरार हुआ नजीर अहमद आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन का सक्रिय सदस्य रहा। फरार होने के कुछ दिन बाद नजीर अहमद ने अपने साथियों के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर में सेना के एक जवान का अपहरण किया था, जिसे किसी दूसरे स्थान पर ले जाकर छोड़ना था, लेकिन इसी बीच सेना के साथ आतंकियों की मुठभेड़ हो गई थी। तब जाकर वह जवान को छोड़कर वहां से फरार हो गए थे। जम्मू-कश्मीर में उसकी कई बार सेना के साथ मुठभेड़ हुई, जिसमें वह हर बार बच गया। नजीर अहमद इतना शातिर था कि वह अपने नाम बदलता रहता था। इसलिए आसानी से पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा।
चार करोड़ से अधिक की संपत्ति की भी छानबीन
गिरफ्तारी के बाद जब पता चला कि आरोपी ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था। इस पर टीम ने चुनाव के दौरान दिए गए हलफनामे को खंगाला। इसमें सामने आया कि आरोपी ने करीब चार करोड़ की संपत्ति दर्शाई है। ऐसे में यह भी सामने आ रहा है कि आतंकी के पास इतनी संपत्ति कहां से आई है। आतंकी संगठन से फंडिंग की बात भी सामने आ रही है। पुलिस इस बिंदु पर भी छानबीन कर रही है। आरोपी ने चार शादी कर रखी है। फिलहाल वह तीन पत्नियों के संपर्क में था।
अचानक हुआ तेज धमाका, मच गई थी अफरा-तफरी
हिजबुल मुजाहिद के आतंकी नजीर वानी के पकड़े जाने के बाद 31 साल पहले हैंड ग्रेनेड के छर्रों से शरीर पर बने ताज खां के जख्म फिर से हरे हो गए। नगर के मटकोटा निवासी ताज खां ट्रक चालक हैं। वह बताते हैं कि जब यह बम धमाका हुआ। वह पास में ही स्थित एक होटल में साथियों के साथ बैठकर चाय पी रहे थे। पैर नीचे लटके थे। जिस कारण धमाके से निकले छर्रे उनके पैरों में लगे। जिसमें वह घायल हो गए थे। उस समय अफरा-तफरी मच गई थी।
ऐसे समझें मामला
1993 में देवबंद के रेती चौक पर कांस्टेबल कन्हैया लाल और कांस्टेबल अर्जुमन अली की ड्यूटी थी। इसी दौरान पुलिसकर्मियों पर ग्रेनेड फेंक दिया गया था, जिसमें दोनों पुलिसकर्मियों के अलावा देवबंद निवासी प्रकाश और सुखबीर भी घायल हो गए थे। इस मामले में पुलिस ने जम्मू-कश्मीर के बड़गाम जिले के हजिफा शरीफाबाद निवासी आतंकी नजीर अहमद वानी उर्फ मुस्तफा पुत्र असद उल्ला को गिरफ्तार किया था। 1994 में जमानत पर छूटने के बाद आरोपी फरार हो गया। तीन दिन पहले एटीएस प्रभारी सुधीर कुमार उज्ज्वल की टीम ने आतंकी को बड़गाम में दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया था।