फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एमएसपी पर खरीद की गारंटी मिले तो सुधरें किसानों के हालात

विज्ञापन
कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन करते राष्ट्रीय लोकदल कार्यकर्ता - फोटो : SAHARANPUR
विज्ञापन
सहारनपुर। नए कृषि कानून में न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी शामिल करने को लेकर पंजाब हरियाणा से लेकर उत्तर प्रदेश तक के किसान आंदोलनरत है। फसलों का एमएसपी घोषित होने के बावजूद किसानों की सारी उपज इस रेट पर नहीं बिक पाती है। जनपद के कई किसान ऐसे भी हैं जिन्हें इस बार भी न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दाम पर सामान्य प्रजाति का धान मंडी में बेचना पड़ा।
विज्ञापन

खेती को लाभकारी बनाने के लिए प्रदेश सरकार फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है। इनमें धान, गेहूं, से लेकर दलहनी और तिलहनी फसलें शामिल हैं। जनपद में सिर्फ गेहूं और धान की फसलों की खरीद के लिए ही सरकारी क्रय केंद्र खोले जाते हैं। सरकारी खरीद के लिए सरकार की ओर से मानक भी तय किए जाते हैं। मानक पूरे नहीं होने पर सरकारी खरीद नहीं हो पाती। मंडी सचिव अशोक गुप्ता ने बताया कि मानकों पर खरा उतरने वाली फसल की ही सरकारी खरीद होती है। मंडी में व्यापारी फसल को बाजार के प्रचलित भाव पर खरीदते हैँ।
बोले किसान-
ग्राम नन्दी फिरोजपुर के प्रगतिशील किसान सेठपाल सिंह का कहना है कि सरकार एमएसपी तो अधिकांश फसलों का घोषित करती है। लेकिन खरीद सिर्फ गेहूं और धान की ही कराती है। सरकार क्रय केंद्रों पर बिकने वाली फसल पर ही किसानों को एमएसपी मिल पाती है। जबकि दलहनी और तिलहनी फसलों को न्यूनतम समर्थन दिलाने के लिए जनपद में सरकारी खरीद नहीं की जाती। यदि एमएसपी की गारंटी को नए कृषि कानून में शामिल कर लिया जाए तब ही किसानों के हालात सुधर सकते हैँ।
विज्ञापन

गांव सहजवा के किसान बिटटू नंबरदार कहते हैं कि मंडी में तो किसानों को हमेशा फसलों का बाजार मूल्य ही मिलता है। अधिकांशतया बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम रहता है। इसलिए केंद्र सरकार को नए कृषि कानूनों में न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने की गारंटी का शामिल करना चाहिए। इससे कम भाव पर फसल खरीदने वालों पर कार्रवाई का प्रावधान भी होना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें