सहारनपुर के छुटमलपुर में दतौली के ग्रामीणों ने खुद के संसाधनों और पैसों से दो किमी लंबे खस्ताहाल पड़े सड़क मार्ग के निर्माण का बीड़ा उठाया है। इसमें संपन्न लोग जहां धन से मदद कर रहे हैं। वहीं आर्थिक रूप से कमजोर लोग श्रमदान कर अपनी भागेदारी तय कर रहे हैं।
सहारनपुर देहात विधान सभा और सदर तहसील के छह हजार की आबादी वाले गांव दतौली मुगल से जनता रोड के गांव लखनौती खुर्द को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण वर्ष 2003 में मंडी समिति द्वारा कराया गया था।
तब से इस सड़क की किसी ने मरम्मत तक कराने की सुध नहीं ली। सड़क में खड्ढे हो गए, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना रहा था।
गांव के पूर्व प्रधान और लोनिवि के ठेकेदार मोहम्मद इसरार बताते हैं
कि अपने कार्यकाल में वे इसके निर्माण के लिए विधायक से लेकर सांसद और आला अफसरों के यहां कई बार गुहार लगाई लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। अब गांव के लोगों ने खुद ही सड़क निर्माण की ठानी।
खास बात यह है कि इस गांव की आधी आबादी के लोग सड़क निर्माण के पेशे से जुड़े हैं। कोई ठेकेदार है तो कोई सड़क निर्माण में मजदूरी करता है। ऐसे में गांव के कई ठेकेदारों के पास सड़क निर्माण करने में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी भी खुद की है।
संसाधनों की उपलब्धता के चलते दो दिन पूर्व गांव में बैठक हुई और तय किया गया कि जिसकी जितनी हैसियत होगी वह उतनी भागेदारी करके सड़क निर्माण में हिस्सेदारी निभाएगा। इसके बाद बुधवार की सुबह सड़क निर्माण कार्य शुरू किया गया।
दो दिन दिन में आधा किमी सड़क बना दी गई है। सड़क निर्माण में लगे ठेकेदार फरमूद, इनाम, बजरी सप्लायर राव मुजम्मिल, राव मोहम्मद यूनुस, राकेश कुमार, विपिन धीमान ने बताया कि गांव के संपन्न परिवारों से जहां नगद धनराशि की मदद मिल रही हैं वहीं आर्थिक रूप से कमजोर लोग इसमें श्रमदान करके अपनी भागेदारी दे रहे हैं।
दतौली के ग्रामीणों की इस पहल की आसपास के गांवों के लोग भी मुक्त कंठ से प्रशंसा कर रहे हैं। उनका यह प्रयास निसंदेह विकास के खोखले दावे करने वाली सरकारों और जनप्रतिनिधियों के लिए एक नसीहत है।