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बीमार बुजुर्ग के कंधों पर आई बच्चों की जिम्मेदारी

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बीमार बुजुर्ग के कंधों पर आई बच्चों की जिम्मेदारी
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देवबंद (सहारनपुर)। क्षेत्र के एक गांव में रहने वाले 42 वर्षीय व्यक्ति की कोरोना संक्रमण से मौत हो गई। अब उस व्यक्ति के बुजुर्ग और बीमार पिता के कंधों पर परिवार के मासूमों की जिम्मेदारी आ गई है।
वह व्यक्ति गुरुग्राम स्थित एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था। 8 मई को उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह कोरोना से चल रही जिंदगी की जंग हार गया। परिवार में विधवा के अलावा 9 वर्षीय पुत्र और तीन वर्षीय पुत्री को रोता बिलखता छोड़ गया। घर में अब कोई कमाने वाला नहीं है। बच्चों के बाबा भी बीमार रहते हैं जो बुजुर्ग हैं। ऐसे में बच्चों की परवरिश कैसे होगी, यह बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। उनके पास खेती की जमीन या अन्य कोई जरिया भी नहीं है, जिसके सहारे बच्चों का पालन पोषण हो सके।
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चार बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
बड़गांव। कोरोना महामारी ने इलेक्ट्रॉनिक की छोटी सी दुकान चलाकर परिवार का पेट पाल रहे मैकेनिक का जीवन खत्म कर दिया। उसकी विधवा बताती है कि मौत से करीब 15 दिन पहले उन्होंने कोविड़ 19 की पहली वैक्सीन लगवाई थी, तभी से बुखार की शिकायत रहने लगी थी। दिन प्रतिदिन उसकी हालत बिगड़ती चली गई थी।
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परिजन उसे सबसे पहले रुड़की के किसी निजी अस्पताल में लेकर गए, वहां आराम न मिलने पर सहारनपुर अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से सांस लेने में दिक्कत आने पर हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। हरियाणा के जगाधरी स्थित गाबा अस्पताल में दो दिन बाद उनकी मौत हो गई। जमा पूंजी उपचार में खत्म हो गई। परिवार में विधवा महिला और चार बच्चे हैं, जिनमें तीन बहनें और एक भाई है। आजीविका का कोई साधन नहीं है। अब बेटे पर ही परिवार के भरण पोषण और बहनों की शादी की जिम्मेदारी आ पड़ी है।
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