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Saharanpur News: खून के रिश्तों में घुला नफरत का जहर

Sat, 17 Oct 2026 01:07 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
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सहारनपुर। रिश्तों की डोर जब भरोसे के बजाय नफरत से बंधने लगे तो घर की चहारदीवारी भी महफूज नहीं रहती। जिले में अपनों के हाथों अपनों के कत्ल की घटनाएं इसी कड़वी हकीकत को बयां कर रही हैं। कहीं पति ने पत्नी, बच्चों और मां को गोलियों से भून दिया, कहीं भाई अपनी ही बहन का कातिल बन गया तो कहीं साले ने जीजा की जान ले ली। प्रेम संबंधों से उपजे विवाद हों या परिवार के भीतर की रंजिश, बात-बात पर बढ़ता तनाव कई बार जिंदगी छीनने तक पहुंचा। लाखनौर में पंचायत सहायक कोमल की उसके सगे भाई के हाथों हत्या ने एक बार फिर रिश्तों के इसी खौफनाक चेहरे को सामने ला दिया है।
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एक घर में चार हत्याएं, दूसरे में पांच मौतें
20 जनवरी 2026 को सरसावा की कौशिक विहार कॉलोनी में अमीन अशोक राठी ने अपनी पत्नी अंजिता, दो बेटों कार्तिक और देव तथा मां विद्यावती की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने खुद को भी गोली मार ली। एक ही परिवार के चार सदस्यों की हत्या से इलाका दहल उठा था। इससे पहले 22 मार्च 2025 को गंगोह के गांव सांगाठेड़ा में भाजपा नेता योगेश रोहिला ने अपनी पत्नी नेहा और तीन बच्चों श्रद्धा, शिवांश व देवांश को गोलियों से भून दिया था। सवाल यह है कि जिन रिश्तों को जिंदगी का सहारा बनना था, वही पूरे परिवार के खात्मे की वजह बन गए।

भाई-बहन और साले-जीजा का रिश्ता भी नहीं बचा
इसी तरह 23 मार्च 2026 को फतेहपुर सीएचसी में राखी को उसके भाइयों ने गोली मार दी थी। उपचार के दौरान राखी की मौत हो गई। वहीं, नौ जून 2026 को रामपुर मनिहारान में साले मंजीत ने अपने जीजा शिवकुमार की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अब लाखनौर में कोमल की हत्या ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि आखिर रिश्तों में ऐसा क्या टूट रहा है कि अपनों के बीच ही जान की दुश्मनी पैदा हो रही है।
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परिस्थितियां अलग, अंजाम सिर्फ मौत
इन वारदात में परिस्थितियां भले अलग-अलग रही हों, लेकिन अंजाम एक ही रहा। किसी का सुहाग उजड़ा, किसी के सिर से माता-पिता का साया उठा तो किसी घर का चिराग बुझ गया। रिश्तों में उपजे विवाद जब संवाद और समझदारी के बजाय हिंसा की राह पकड़ते हैं, तो उनकी कीमत सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, पूरा परिवार चुकाता है। अपनों के खून से रंगे हाथ यही सवाल छोड़ रहे हैं कि आखिर गुस्से और रंजिश के आगे रिश्तों की अहमियत इतनी छोटी कैसे पड़ती जा रही है।
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