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लॉकडाउन में फंसे पश्चिम बंगाल के लोगों को गुरुद्वारे में दी शरण

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सहारनपुर के गुरुद्वारे में ठहरे परिवार की बच्ची की स्क्रीनिंग करती चिकित्सीय टीम। - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। लॉकडाउन में ट्रेनों और बसों के नहीं चलने से बेहाल पश्चिम बंगाल के लोगों को गुरुद्वारा प्रबंधन ने शरण दी है। इससे पहले सर्विलांस और चिकित्सीय टीमों से थर्मल स्क्रीनिंग और काउंसिलिंग कराई गई। इसमें इन लोगों को खतरे से बाहर पाया गया है।
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पश्चिम बंगाल के जनपद पश्चिम वर्धमान के कस्बा चितरंजन के दो परिवारों के सदस्यों को यहां शरण दी गई है। इनमें 47 वर्षीय प्रहलाद चंद, 44 वर्षीय रजनीश, 43 वर्षीया महिला रिंकू सिंह, 10 वर्षीय बालिका प्रियंका, नौ वर्षीय बालक शिवम, 11 वर्षीय बालिका निलोफर हैं। ये पिछले तीन दिन से गुरुद्वारा सिंह सभा के यात्री विश्राम में ठहरे हुए हैं। गुरुद्वारा सिंह सभा के प्रधान सरदार जसबीर सिंह बग्गा ने इसकी जानकारी प्रबंधन समिति को दी। प्रह्लाद चंद और रजनीश ने बताया कि उनके बच्चे देहरादून स्थित मसूरी में पढ़ते हैं। छुट्टियां होने पर उन्हें लेने गए थे। मगर घर पहुंचने से पहले ही ट्रेनों और बसों का संचालन बंद होने के कारण फंस गए।
बच्ची प्रियंका को थी खांसी की दिक्कत
- स्क्रीनिंग करने वाली टीम में शामिल एमपी सिंह चावला ने बताया कि बच्ची प्रियंका को खांसी की शिकायत थी। इस बारे में जिला नोडल कोरोना सर्विलांस अधिकारी डॉ. ओपी गुप्ता और नोडल आफिसर शिवांका गौड़ को सूचित किया। मलेरिया इंस्पेक्टर धर्मेंद के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम ने थर्मल स्क्रीनिंग और चिकित्सीय परीक्षण किया। वह भी खतरे से बाहर है।
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