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राष्ट्रगान पर दारुल उलूम के उलेमा को ऐतराज

Tue, 12 Jan 2016 01:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देवबंद
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दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना मुफ्ती आरिफ कासमी के  राष्ट्रगान जन-गण-मन पर दिए गए बयान ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। उन्होंने कहा कि पंडित रविंद्रनाथ टैगोर ने अंग्रेजी हुकूमत के दौरान मल्लिका विक्टोरिया के हिंदुस्तान आने की खुशी में इसे गया था। अफसोस की बात है कि सियासी रहनुमाओं ने गुलामी की पहचान  इस गीत को ही राष्ट्रगान की हैसियत दे दी।
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सोमवार को दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना मुफ्ती आरिफ कासमी ने राष्ट्रगान के मसले पर  अमर उजाला से बातचीत में कहा कि हिंदुस्तान का कौमी तराना (राष्ट्रगान) जन-गण-मन पंडित रविंद्रनाथ टैगोर ने मल्लिका विक्टोरिया के भारत आगमन पर दिली जज्बात का इजहार करते पेश किया था।

इसमें कहा गया था-हम तन-मन-धन से तुम्हारा स्वागत करते हैं। यह इस मुल्क की खुशनसीबी है कि मल्लिका विक्टोरिया इस मुल्क में आईं।  उन्होंने कहा कि बड़े अफसोस की बात कि जो गीत गुलामी की पहचान है, उसको सियासी रहनुमाओं ने कौमी तराने की हैसियत दे दी और आजादी के बाद उसे कबूल किया।
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मुफ्ती आरिफ कासमी ने कहा कि राष्ट्रगान मुसलमानों के बुनियाद-ए-अकीदे के खिलाफ है और खुद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के बड़े लीडर कौमी तराने के तौर पर इसको नहीं मानते। उन्होंने केंद्र सरकार और तमाम राजनीतिक दलों से अपील की कि अल्लामा इकबाल का तराना सारे जहां से अच्छा, हिंदुस्तां हमारा को राष्ट्रगान करार दिया जाए।

या फिर कोई और ऐसा गीत तैयार किया जाए जो सारे हिंदुस्तानियों को काबिले कबूल हो। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस और भाजपा के जो लीडर न तिरंगे का सम्मान करते हैं और न ही मुल्क से प्यार करते हैं, वो राष्ट्रगान की आड़ में मदरसों और मुसलमानों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं, मगर वे इसमें कभी कामयाब नहीं होंगे।
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