सहारनपुर। शहर की अवैध कॉलोनियों में लगातार विकास कार्यों की शिकायतें मिलने के बाद नगर निगम ने बड़ा फैसला लिया है। नगर आयुक्त की तरफ से निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को निर्देश जारी किए गए हैं कि अवैध कॉलोनियों में कोई काम न कराया जाए। विकास कार्य केवल उन्हीं कॉलोनियों में होगा जो विकास प्राधिकरण से स्वीकृत और नगर निगम को हैंडओवर हो चुकी हैं।
नगर निगम कॉलोनियों में सड़क, नाली, पेयजल, पथ प्रकाश, सफाई सहित अनेक कार्य कराता है। प्रतिदिन काफी लोग अपनी कॉलोनियों में विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए पहुंचते हैं। जनसुनवाई में भी ज्यादातर समस्याएं सड़क, नाली, पथ प्रकाश आदि से संबंधित पहुंचती हैं। देखने में आया है कि नगर निगम की जांच में ज्यादातर शिकायत और समस्याएं अवैध कॉलोनियों से संबंधित रहती हैं। पूर्व में शासन और मंडल आयुक्त अवैध कॉलोनियों में काम न कराने के आदेश दे चुके हैं।
शासन और प्रशासन का मानना है कि अवैध कॉलोनियों में काम कराने से अवैध कॉलोनियों को बढ़ावा मिलता है। इसका फायदा अवैध कॉलोनाइजर उठाते हैं। ऐसे में नगर आयुक्त ने निर्देश दिए हैं कि किसी भी कॉलोनी में काम कराने से पहले यह स्पष्ट कर लिया जाए कि कॉलोनी विकास प्राधिकरण द्वारा नगर निगम को हस्तांतरित की गई है या नहीं। यदि सड़क सार्वजनिक है यानी कॉलोनी की भूमि पर नहीं है तो उसकी जांच और सत्यापन कराने के बाद ही आगणक तैयार किया जाए। यदि किसी अवर अभियंता के द्वारा अवैध कॉलोनी में सड़क या नाली आदि का आगणक तैयार किया जाता है तो कार्रवाई होगी।
50 से अधिक अवैध कॉलोनियां
नगर निगम ने बीते वर्ष 46 अवैध कॉलोनियों की सूची सार्वजनिक की थी। इसके दो बड़े होर्डिंग नगर निगम में लगाए गए थे। वर्तमान में अवैध कॉलोनियों की संख्या 50 से अधिक हो चुकी है। वास्तविक संख्या के लिए नगर निगम के अधिकारी विकास प्राधिकरण से संपर्क कर रहे हैं।
32 गांवों पर नहीं होगा असर
शहर में शामिल 32 गांव अवैध कॉलोनियों में नहीं आएंगे। अधिकारियों का कहना है कि सभी गांव 100 या उससे अधिक वर्ष पुराने हैं, जिनमें काम होते रहेंगे। इसके अलावा यदि कोई कॉलोनी विकास प्राधिकरण बनने से पहले की है तो उस पर भी विचार किया जाएगा।
अवैध कॉलोनियों में काम कराना नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं है। जो कॉलोनियां प्राधिकरण द्वारा हस्तांतरित हैं उनमें कार्य हो रहे हैं और होते रहेंगे।
- एसपी मिश्रा, मुख्य अभियंता, निर्माण विभाग, नगर निगम