सहारनपुर। मोहर्रम का चांद दिखाई देने पर इमाम बारगाहों में तैयारी पूरी की गई। इसके साथ ही करबला के शहीदों की याद में अजादारी शुरू हो गई। सोमवार को मोहर्रम की पहली तारीख है। इसके तहत इमाम बारगाहों में मजलिस होंगी।
उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड लखनऊ के स्थायी अधिवक्ता मंजर हुसैन काजमी ने बताया कि मोहर्रम का महीना हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद दिलाता है। हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम रसूले खुदा के नवासे थे, जिन्होंने करबला के मैदान में इस्लाम धर्म को बचाने के लिए अपने छह माह के बच्चे से लेकर नौजवानों और बुजुर्ग के साथ शहादत दी थी। शिया समुदाय मोहर्रम के महीने में हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का पैगाम दुनिया तक पहुंचाता है। मजलिसों और जुलूस के जरिए हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का पैगाम नागरिकों को दिया जाता है। उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने फरमाया था कि आतंकवाद के खिलाफ करबला में 72 साथियों ने शहादत दी थी, लेकिन यजीद के हजारों लश्कर से टकराकर यह शिक्षा दी कि जालिम कितना ही ताकतवर क्यों न हो, उससे डर कर चुप नहीं बैठना चाहिए। देर रात मजलिसों में मुस्लिम धर्म गुरुओं ने शहादत पर प्रकाश डाला। मजलिस में सबसे पहले मरसिए खानी की गई।