सहारनपुर/बड़गांव। रसोई गैस सिलिंडर की किल्लत का असर परिषदीय विद्यालयों में बनने वाले मध्याह्न भोजन पर भी पड़ रहा है। कई विद्यालयों में पिछले 15 से 20 दिनों से गैस सिलिंडर खत्म है। ऐसे में मजबूरन चूल्हे पर लकड़ी जलाकर भोजन तैयार करना पड़ रहा है। इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा जिला पूर्ति अधिकारी को पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन फिर भी स्थिति खराब है।
बड़गांव क्षेत्र के गांव शब्बीरपुर स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय पिछले कई दिनों से इस विकट समस्या से जूझ रहा है। वहीं नूनाबड़ी गांव के पीएम श्री कंपोजिट विद्यालय में एक सप्ताह से गैस नहीं मिलने के कारण ग्रामीणों से गैस सिलिंडर मांगकर किसी तरह मध्याह्न भोजन का प्रबंध किया जा रहा है। शिमलाना, महेशपुर, नयागांव, दल्हेड़ी, जड़ौदा पांडा जैसे गांवों के विद्यालयों में भी पिछले कई दिनों से यहीं स्थिति बनी हुई है। प्राथमिक विद्यालयों में गैस आपूर्ति बाधित न हो इसके लिए बीएसए ने जिला आपूर्ति अधिकारी को पत्र लिखकर गैस एजेंसियों से परिषदीय विद्यालयों में छात्र संख्या के अनुसार प्राथमिकता के आधार पर गैस रिफिल उपलब्ध कराने की मांग की थी। रसोइयों का कहना है यदि लकड़ी के चूल्हे पर भोजन बनाया जाता है तो उनका मानदेय रोक दिया जाता है।
चाय की दुकानों पर इस्तेमाल हो रहा घरेलू सिलिंडर
नागल। कस्बे और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में चाय की दुकानों पर बड़े पैमाने पर घरेलू रसोई गैस सिलिंडरों का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। नियमानुसार व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कॉमर्शियल सिलिंडर का उपयोग अनिवार्य है, लेकिन अधिक कीमत के चलते दुकानदार घरेलू सिलिंडर इस्तेमाल करते हैं। लोगों का कहना है कि इसके चलते घरेलू गैस की उपलब्धता पर भी असर पड़ रहा है। सुरक्षा के लिहाज से भी यह स्थिति चिंताजनक है। घरेलू सिलिंडरों का लगातार और अधिक दबाव में व्यावसायिक उपयोग दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है।
जिलाधिकारी को लिखा पत्र
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संदीप सिंह पंवार ने जिलाधिकारी मनीष बंसल को पत्र लिखकर परिषदीय विद्यालयों को मध्याह्न भोजन के लिए सिलिंडर उपलब्ध कराने की मांग की है। संदीप पंवार का कहना है कि सिलिंडर न मिलने के कारण शिक्षकों और रसोइयों को परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है।