देवबंद। समय बीतने के साथ घावों पर पपड़ी जरूर जम जाती है, लेकिन अपनों को खोने का दर्द कभी नहीं भरता। देवबंद क्षेत्र के निहालखेड़ी गांव स्थित पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट को एक वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है। मगर उस हादसे में उजड़े परिवार आज भी उसी दर्द, बेबसी और मुफलिसी के बीच जिंदगी काटने को मजबूर हैं।
गंगोह में हुए पटाखा फैक्टरी धमाके ने देवबंद में एक साल पहले हुए हादसे के पीड़ितों के जख्मों को फिर से कुरेद दिया है। 26 अप्रैल 2025 को निहालखेड़ी गांव में संचालित पटाखा फैक्टरी में अचानक हुए जोरदार धमाके ने तीन घरों के चिराग हमेशा के लिए बुझा दिए थे। विस्फोट इतना भयावह था कि फैक्टरी मलबे में तब्दील हो गई और वहां काम कर रहे फतेहपुर निवासी राहुल उर्फ काका (24), गुनारसा गांव निवासी विशाल (25) और जडौदा जट्ट निवासी विकास कश्यप (19) की मौत हो गई थी। घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का तांता पीड़ित परिवारों के घरों पर लगा रहा। बड़े-बड़े आश्वासन दिए गए कि किसी भी परिवार को बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा। सरकार की ओर से चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी दी गई, लेकिन यह रकम परिवारों के लंबे संघर्ष के सामने बेहद छोटी साबित हुई।
फतेहुपर निवासी राहुल के पिता रामकुमार, गुनारसा निवासी विशाल के पिता संदीप और जड़ौदा जट्ट गांव निवासी विकास कश्यप के पिता राजबल का दर्द एक जैसा मिला। तीनों ने बताया कि हादसे के बाद कुछ दिनों तक हर कोई उनके दुख में शामिल हुआ। वक्त गुजरने के साथ सबने मुंह मोड़ लिया। अब कोई यह पूछने भी नहीं आता कि घर का खर्च कैसे चल रहा है। मजबूरी में परिवार के सदस्य खेतों में मजदूरी, ईंट-भट्टों और दिहाड़ी का काम कर किसी तरह दो वक्त की रोटी जुटा रहे हैं।