जैन डिग्री कॉलेज में चुनाव पर चर्चा करते प्रोफेसर।
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देश विदेश में नाम चमकाने वाला अपना सहारनपुर सिर्फ टापू बनकर रह गया है। शहर की खस्ताहाल सड़के, जाम, चरमराई यातायात व्यवस्था और साफ सफाई से आज तक निजात नहीं मिल सका है।
मंत्री, सांसद, विधायक समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने चुनाव जीतने से पहले बड़े बड़े वायदे तो जरुर किए, लेकिन चुनाव जीतने के बाद सभी वायदे खोखले साबित हुए। अमर उजाला की टीम ने बुधवार को शहर के आवास विकास क्षेत्र का रुख किया। यहां बैठे लोग चुनाव को लेकर मंथन कर रहे थे। प्रत्याशी के चयन को लेकर सबके अपने अपने तर्क सुनने को मिले।
डा. विरेंद्र शम्मी की सुने तो जब से उत्तराखंड बना है तब से सहारनपुर सिर्फ टापू बनकर रह गया है। दिल्ली जाने के लिए सुबह सुपर फास्ट और उज्जैनी दोनों ट्रेन छूट जाएं तो शाम चार बजे तक कोई एक्सप्रेस ट्रेन नहीं है। प्रोफेसर ज्योति सिंह कहती है कि महिलाओं का घर से निकलना सुरक्षित नहीं है। बंदी पुलिस कस्टडी से ही फरार हो रहे है।
डा. अनिल कुमार जैन का कहना है कि सबसे बड़ा मुद्दा सड़कों पर सुरक्षा है। लेकिन नेता झूठे आश्वासनों तक सीमित है। डा. वकुल बंसल और डा. विनोद कुमार कहते है कि विश्वविद्यालय स्थापना को लेकर बड़े बड़े आश्वासन जरुर दिए गए, लेकिन समस्या जस की तस बनीं है। सभी का कहना है कि इन्हीं मुद्दों को ध्यान में रखकर हम अपना वोट करेंगे।