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जिले के शिक्षकों के प्रमाणपत्रों पर जालसाजों की नजर

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सहारनपुर। चर्चित अनामिका शुक्ला की तरह सहारनपुर के शिक्षक के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की भी रंगीन कॉपी तैयार कर जालसाज दूसरे लोगों को थमा रहे हैं। इन्हीं प्रमाणपत्रों के माध्यम से वह लोग नौकरी कर रहे हैं। ताजा मामला हरिद्वार का है, जहां एक शिक्षक सहारनपुर में तैनात शिक्षक के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों पर नौकरी करता मिला है।
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हरिद्वार में एसआईटी की जांच में परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के तीन शिक्षक दूसरे लोगों की डिग्रियों पर नौकरी करते मिले हैं। इसका खुलासा सात सितंबर 2020 को किया गया है। खास बात यह है कि हरिद्वार के मुरलीवाला स्थित प्राथमिक विद्यालय में नौकरी करते मिले मुरादाबाद निवासी कमलवीर की डिग्रियां सहारनपुर के कुराली स्थित प्राथमिक विद्यालय में तैनात ओमकुमार की हैं। कमलवीर ने ओमकुमार के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की रंगीन फोटोकॉपी के सहारे नौकरी पाई थी। ऐसे में आशंका है कि जनपद के अन्य शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का भी दुरुपयोग तो नहीं हो रहा है।
कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में दो मिले
बीते दिनों अनामिका शुक्ला प्रकरण काफी चर्चाओं में रहा। इसमें कई महिलाएं अनामिका शुक्ला के प्रमाणपत्रों की रंगीन फोटोकॉपी के आधार नौकरी करती पाई गई थीं। सहारनपुर में भावना नाम की युवती अनामिका शुक्ला बनकर नौकरी कर रही थी, जो गिरफ्तार हो चुकी है। इसके अलावा वेद कुमारी नाम की शिक्षिका के प्रमाणपत्र भी फर्जी पाए गए थे।
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पहले भी मिलते रहे हैं मामले
फर्जी प्रमाणपत्रों पर शिक्षक बनने की यह पहली घटना नहीं हैं। बीते वर्ष भी सहारनपुर में दो शिक्षक फर्जी डिग्रियों पर नौकरी करते मिले थे। वर्ष 2004-05 में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से बीएड की फर्जी डिग्रियां बनाए जाने की सूचना के बाद एसआईटी ने जांच की थी। जांच में सहारनपुर में साढ़ोली कदीम में चंद्रपाल और रामपुर मनिहारान में सचिन कुमार नाम के व्यक्ति फर्जी डिग्री पर नौकरी करते मिले थे।
यह भी जांच का विषय
शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की रंगीन फोटोकॉपी तैयार करने वाला रैकेट सक्रिय है। बड़ी बात यह है कि उक्त रैकेट को शिक्षकों के दसवीं से लेकर बीएड तक के शैक्षणिक प्रमाणपत्र उपलब्ध कहां से हो रहे हैं, जिनकी वह रंगीन फोटोकॉपी करते हैं। क्योंकि ब्लैक एंड व्हाइट फोटोकॉपी से हूबहू रंगीन कॉपी नहीं की जा सकती है। संबंधित शिक्षण संस्थाओं से दसवीं से लेकर बीएड तक के प्रमाणपत्र बनवाना आसान नहीं है। चूंकि शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र विभाग में जमा रहते हैं। ऐसे में यह जांच का विषय है कि फोटोकॉपी तैयार करने वालों को शैक्षणिक प्रमाणपत्र मिलते कहां से हैं।
हरिद्वार की घटना की जानकारी नहीं है। मगर हमारे यहां ज्यादातर शिक्षकों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन हो चुका है। कोरोना की वजह से कुछ शिक्षकों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन रुका है, जिसे जल्द कराया जाएगा।
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- रमेंद्र कुमार सिंह, बीएसए।
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