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फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी पाने वाले पांच शिक्षक बर्खास्त

Mon, 21 Sep 2015 11:38 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, सहारनपुर
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माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी हासिल करने वाले पांच शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया है। विभाग की इस बड़ी कार्रवाई से हड़कंप मचा है।
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उल्लेखनीय है कि शिक्षा विभाग के राजकीय स्कूलों में पिछले दिनों एलटी शिक्षकों की भर्ती की गई थी। मंडल के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली में कुल 212 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया की गई थी। शिक्षकों के कार्यभार ग्रहण करने के बाद सभी के प्रमाण पत्रों के जांच करवायी गई। जांच में पांच शिक्षकों के दस्तावेज फर्जी पाये गए। इस फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद प्रभारी संयुक्त शिक्षा निदेशक की ओर से पांचों शिक्षकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया था। विभाग ने कड़ा कदम उठाते हुए पांचों शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया। विभाग की इस बड़ी कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा है।

बर्खास्त होने वाले शिक्षक
- अरविंद कुमार पुत्र गोपाल सिंह  
- जयवीर सिंह पुत्र गोपाल सिंह
- शुभेंदु पांडे पुत्र राजीव पांडे
- मनोज कुमार यादव पुत्र बाबूराम
- श्रीराम शुक्ला पुत्र सत्यनारायण शुक्ला

- पांच शिक्षकों ने फर्जी दस्तावेजों पर नियुक्ति हासिल कर ली थी। पांचों फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया है।
- आरके तिवारी, प्रभारी संयुक्त शिक्षा निदेशक

108 शिक्षकों की नियुक्ति कर दी निरस्त
माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी पाने वाले पांच शिक्षकों को बर्खास्त करने के साथ ही कार्यभार ग्रहण न करने वाले 108 शिक्षक-शिक्षिकाओं की नियुक्ति निरस्त कर दी गई है। विभाग की इस कार्रवाई के बाद कई शिक्षकों ने विभाग के चक्कर काटने शुरू कर दिए है।
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माध्यमिक स्कूलों में एलटी शिक्षकों के लिए कुल 212 पदों पर नियुक्ति की गई थी। काउंसिलिंग में 111 महिला और 77 पुरुष ही शामिल हुए थे। इसके चलते इन शिक्षकों को ही नियुक्ति पत्र जारी किये गए थे। नियुक्ति पत्र जारी होने के कई दिनों बाद तक 108 शिक्षकों ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया। इनमें 61 महिलाएं और 47 पुरुष शामिल है। शिक्षा विभाग ने इन शिक्षकों के प्रति कड़ा रवैया अपनाते हुए सभी की नियुक्ति निरस्त कर दी है।

विभाग की इस कार्यवाही से बाद कई शिक्षकों ने विभाग के चक्कर काटने शुरू कर दिये है। प्रभारी संयुक्त शिक्षा निदेशक राधाकृष्ण तिवारी का कहना है कि नये शिक्षकों को लंबे समय तक कार्यभार ग्रहण करने के लिए समय दिया गया। लेकिन उसके बावजूद भी कार्यभार ग्रहण न करने वाले शिक्षकों की नियुक्ति निरस्त की गई है। 
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