जिला अस्पताल में मरीज की आंखों की जांच करते नेत्र
सहारनपुर। आंखों में मोतियाबिंद पहले 50 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों में होता था। अब 20 से 30 साल की उम्र में भी आंखों की रोशनी मंद हो रही है। सरकारी और निजी अस्पतालों में सफेद मोतियाबिंद के मामले बढ़ रहे हैं। बीते चार महीने में 4905 मोतियाबिंद के ऑपरेशन हुए हैं। इसका मुख्य कारण शुगर, बीपी, खानपान में बदलाव और लगातार स्टेरॉयड दवाओं का सेवन है। युवाओं में मोबाइल और ज्यादा पढ़ाई भी इसका कारण माना जा रहा है।
एसबीडी जिला अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ कक्ष के बाहर मरीजों की लाइन लगती है। ओपीडी में रोजाना 80 से 100 मरीज आ रहे हैं। इनमें 15 से 20 मरीजों में मोतियाबिंद की शिकायत मिलती है। दो से तीन मरीज ऐसे होते हैं, जिनकी कम उम्र में ही आंखों में मोतियाबिंद मिल रहा है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव बताते हैं कि खानपान में बदलाव के कारण युवा डायबिटीज के शिकार हो रहे हैं। डायबिटीज का आंखों पर असर आ रहा है। इसके अलावा किसी मर्ज में दवा का अधिक सेवन करने से भी आंखों पर असर पड़ता है। ज्यादा स्टेरॉयड दवा नहीं खानी चाहिए। समय-समय पर आंखों की जांच कराना जरूरी है।