इसके अलावा बिजनौर गांव मंडावर निवासी बुद्दू, मेरठ के सदर बाजार निवासी रामफल, जिला शाहजहांपुर के लुकभावनपुर निवासी सोहन सिंह, जिला सहारनपुर निवासी दयाराम को डकैती और हत्या के दोष में फांसी पर लटकाया गया। हरिद्वार के थाना ज्वालापुर क्षेत्र के गांव भूराभूरी निवासी अली को हत्या के दोष में फांसी दी गई। आखरी बार सहारनपुर के मोहल्ला शाहमदार निवासी इनाम को पत्नी की हत्या में दोषी सिद्ध होने पर तीन जून 1968 की सुबह 4ः30 बजे फांसी दी गई थी।
सजा हो चुकी है कई दोषियों को
जिले में हुए तिहरे हत्याकांड में 2004 में अदालत ने चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। वर्ष 2001 में थाना सरसावा के गांव मंधौर में पुरानी रंजिश के चलते तीन भाई भीम सिंह, धर्मपाल, जयपाल की हत्या कर दी गई थी। अदालत ने 2004 में गांव के ही जसबीर, संजय, प्रदीप और रामभूल को साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि, वह हाईकोर्ट से बरी हो गए थे। अब 20 साल बाद कर्मवीर हत्याकांड में पांच दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है।
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जिला कारागार में अंतिम फांसी 1968 में हुई थी। इसके बाद यहां किसी को फांसी नहीं दी गई है।
- अमिता दुबे, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
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