सहारनपुर। मंडल ने गन्ना उत्पादन में लंबी छलांग लगाई है। शामली और मुजफ्फरनगर ने प्रदेश में क्रमश: पहला और तीसरा स्थान हासिल किया है। शामली लगातार आठवें वर्ष प्रदेश में प्रति हेक्टेयर गन्ना उत्पादन में पहले पायदान पर आया है।
प्रदेश सरकार ने गन्ना क्रॉप कटिंग के आंकड़े जारी किए हैं। इसमें शामली ने 2025-26 में प्रति हेक्टेयर 969.12 क्विंटल की उपज हासिल की है। इसी तरह मुजफ्फरनगर ने भी 900.96 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज प्राप्त की। इस लक्ष्य में सहारनपुर जिला पिछड़ा है। सहारनपुर जिले ने 825 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज रही है। यह पहला मौका नहीं है, जब शामली ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। वर्ष 2018-19 में शामली की औसत गन्ना उपज 962.12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी।
इसके बाद वर्ष 2019-20 में 990.64, वर्ष 2020-21 में 1004.28, वर्ष 2021-22 में 1014.16, वर्ष 2022-23 में 1025.12, वर्ष 2023-24 में 1036.04 और वर्ष 2024-25 में 1023.16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज दर्ज की गई। गन्ना विभाग के अनुसार किसानों द्वारा उन्नत गन्ना प्रजातियों को लगाया गया, साथ ही समय पर सिंचाई, सीमित खाद और वैज्ञानिक विधि के प्रयोग से यह उपलब्धि हासिल की है।
पूर्वांचल के मुकाबले पश्चिम में उपज बेहतर
क्रॉप कटिंग के मामले में दूसरे नंबर पर रहा बागपत। बागपत में 914.16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज प्राप्त हुई है। मेरठ में 888.68 क्विंटल प्रति हेक्टेयर का उत्पादन हुआ है। उपज के मामले में पूर्वांचल के मुकाबले पश्चिमी जिलों का प्रदर्शन बेहतर है। पूर्वांचल के जिले बस्ती में 711.64, देवरिया में 688.64, बलिया में 684.08 और आजमगढ़ में उपज 697.08 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही। प्रदेश की गन्ने की औसत उपज 825.56 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
गन्ना क्रॉप कटिंग में शामली और मुजफ्फरनगर ने शानदार प्रदर्शन किया है। हालांकि सहारनपुर इसमें थोड़ा पीछे रहा है। प्रदर्शन को सुधारने के लिए किसानों को उन्नतशील बीज और वैज्ञानिक पद्धति से खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
- ओपी सिंह, उप गन्ना आयुक्त, सहारनपुर मंडल