बेहट क्षेत्र के आलमपुर खुर्द गांव में लगी फूलों की फसल।
सहारनपुर। जरबेरा, गुलाब और कार्नेशन की खेती से जिले की मिट्टी महक रही है। फूलों की खेती से मुनाफा ऐसा कि किसान पारंपरिक खेती के साथ अब इस ओर अधिक रुझान कर रहे हैं। यही कारण है कि जिले में फूलों की खेती के रकबे में नौ वर्षों में करीब चार गुना की बढ़ोतरी हुई है।
गेंदे की खेती और फूलों के समुचित विकास के लिए दोमट मिट्टी सही मानी जाती है, जिस भूमि का पीएच मान 7 और 7.5 के बीच हो उसमें गेंदे और फूलों की खेती बढ़िया होती है। फूलों की खेती में लागत कम आती है। साथ ही दवाई एवं कीटनाशकों पर होने वाला खर्चा भी परंपरागत फसलों से कम होता है। इसका असर है कि जिले में लगातार रकबा बढ़ रहा है। वर्ष 2017 में जहां फूलों की खेती करीब 95 हेक्टेयर क्षेत्रफल में होती थी। वहीं वर्ष 2026 में यह बढ़कर 450 हेक्टेयर तक पहुंच गई हैं। इसमें गेंदा का रकबा 2017 में 60 हेक्टेयर था, जो 2026 में बढ़कर 325 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। इसकी उत्पादकता भी 20 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है। इसी तरह गुलाब का रकबा 20 हेक्टेयर से बढ़कर 40 हेक्टेयर तक पहुंचा है। वर्तमान में जिले में गुलाब की प्रति हेक्टेयर 40 लाख फूलों से अधिक की उत्पादकता है। अन्य फूलों का रकबा भी 15 से 85 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। इनकी उत्पादकता में वृद्धि हुई है। ऑफ सीजन से लेकर शादियों के सीजन में फूलों के दाम अच्छे मिलते हैं। स्थानीय स्तर पर तो खपत है ही। बाहरी राज्यों में भी फूलों की भारी मांग है। संवाद