सहारनपुर। सर्किट हाउस रोड पर अनुसूचित जाति के लोगों के मकान तोड़े जाने के मामले में विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा प्रस्तुत की गई जांच रिपोर्ट को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि सिटी मजिस्ट्रेट प्रकरण में खुद विपक्षी हैं। ऐसे में वह प्रकरण की जांच रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत नहीं कर सकते हैं। कोर्ट ने जिलाधिकारी को मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने के निर्देश दिए।
ऐसे समझें मामला
बता दें, कि जिला प्रशासन सर्किट हाउस रोड का चौड़ीकरण करा रहा है। सर्किट हाउस रोड की जमीन का स्वामित्व सिंचाई विभाग का है। सिंचाई विभाग ने चौड़ीकरण के लिए दोनों तरफ की पटरियों की पैमाइश करते हुए अनेक भवनों के हिस्से को अतिक्रमण बताते हुए निशानदेही की थी। संबंधित को नोटिस जारी करते हुए चार अप्रैल तक खुद अतिक्रमण हटाने को कहा था। आरोप है कि सिंचाई विभाग सहित कई विभागों के अधिकारी एक अप्रैल को जेसीबी लेकर मौके पर पहुंच गए थे और अनेक लोगों के मकानों को तोड़ते हुए नुकसान पहुंचाया।
-
विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी अदालत में डाली थीं याचिकाएं
मामले में हंसराज सिंह और नरेश कुमार ने एससी-एसटी कोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। उन्होंने नगर आयुक्त सहित आठ अधिकारियों और 50 अज्ञात के खिलाफ याचिका डाली थी। सभी को 20 मई को पेश होने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही जिलाधिकारी को 15 दिन के भीतर जांच आख्या प्रस्तुत करने को कहा था। जिलाधिकारी द्वारा सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह को जांच अधिकारी नामित किया था। चूंकि कुलदीप सिंह ध्वस्तीकरण के दौरान मौके पर मौजूद थे। ऐसे में पीड़ितों ने सवाल उठाया था कि आरोपी को जांच अधिकारी कैसे बनाया है? लेकिन उनके आपत्ति जताने का कोई असर नहीं हुआ।
अधिवक्ता राजकुमार ने बताया कि सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा जांच रिपोर्ट अदालत में पेश की गई है, जिसे अदालत ने भी यही कहते हुए खारिज किया है कि सिटी मजिस्ट्रेट प्रकरण में खुद विपक्षी हैं। ऐसे में वह प्रकरण की जांच रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत नहीं कर सकते। दोनों मामलों की अगली सुनवाई 10 जून को निर्धारित की गई है।
उच्च स्तरीय जांच के आदेश
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि नगर आयुक्त सहारनपुर भी मामले में पक्षकार हैं। इसलिए उनसे उच्च स्तर के प्रशासनिक अधिकारी द्वारा जांच कराई जाए। जिलाधिकारी को निर्देशित किया है कि वह स्वयं या संबंधित पक्षकारों से उच्च स्तर के प्रशासनिक अधिकारी के माध्यम से निष्पक्ष जांच कराकर दस दिन के अंदर कोर्ट में पेश करें।
सिटी मजिस्ट्रेट की तरफ से यह दी गई थी रिपोर्ट
सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा पेश की गई जांच रिपोर्ट लिखा गया है कि तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर समिति गठित की गई थी। समिति ने अभिलेखों के आधार पर मार्ग की भूमि का सत्यापन किया। निरीक्षण में कुछ स्थानों पर सड़क, नाली और रजबहे की भूमि पर अतिक्रमण मिला था। सभी को नोटिस जारी किए गए थे। कई लोगों ने खुद अतिक्रमण हटाया था, जबकि शेष अवरोधों को प्रशासनिक कार्रवाई से हटाया गया। उन्होंने कोर्ट में कहा है कि कार्रवाई के दौरान किसी के मकान को नुकसान नहीं पहुंचाया गया।