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Saharanpur News: दाखिला होना है बच्चे का, टेस्ट लिया जा रहा अभिभावक का

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संवाद न्यूज एजेंसी
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सहारनपुर। हसनपुर निवासी राकेश अपने बच्चे का प्रवेश नर्सरी में कराने के लिए एक स्कूल में पहुंचे तो वहां प्रवेश से पहले उनकी और उनकी पत्नी की शिक्षा के बारे में पूछा गया।
अंग्रेजी भाषा आती है या नहीं इस पर भी बात हुई। दाेनों के शिक्षित होने के बाद बच्चे को प्रवेश देने को स्कूल राजी हुआ। यह तो सिर्फ एक केस है। आए दिन स्कूलों में इस तरह के मामले आ रहे हैं।
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जनपद के अन्य स्कूल भी बच्चे को प्रवेश देने से पहले अभिभावकों का सामान्य टेस्ट और पूछताछ कर रहे हैं।
शिक्षा का अधिकार कानून में स्पष्ट किया गया है कि बच्चे के प्रवेश के लिए अभिभावकों का टेस्ट नहीं लिया जा सकता। कानून कहता है कि अशिक्षित अभिभावकों के बच्चों को भी अच्छे स्कूलों में पढ़ने का अधिकार है। तभी कानून में पब्लिक स्कूलों की 25 फीसदी सीटें निर्धारित की गई हैं, लेकिन कुछ स्कूल अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। उन्होंने यह रास्ता निकाला हुआ है कि वह लिखित में तो नहीं, लेकिन मौखिक रूप से काफी कुछ पता कर लेते हैं। अभिभावकों के अशिक्षित या कम
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पढ़े लिखे होेने पर बच्चे को प्रवेश देने से इनकार तक कर देते हैं। सवाल यह है कि, जिन बच्चों के अभिभावक अशिक्षित या कम पढ़े लिखे हैं तो क्या उनके बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ने के हकदार नहीं।
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