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सियासी घोषणाओं के दलदल में फंसा सहारनपुर के विकास का रथ

Fri, 28 Apr 2017 12:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
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अधर में लटका देवबंद फ्लाईओवर। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में प्रदेश के सबसे अंतिम जिले सहारनपुर पर अब तक मुख्यमंत्री महंत आदित्यनाथ योगी की नजरें इनायत नहीं हुई है। यही कारण है कि नई योजना और परियोजना को मिलना तो दूर पहले से पड़ी आधी-अधूरी परियोजनाएं भी उम्मीद भरी निगाहों से लखनऊ निहार रही हैं।
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सड़कों से लेकर अन्य परियोजनाएं लंबे समय से लंबित हैं और धनाभाव में उनकी प्रगति नहीं हो रही है। हालांकि प्रदेश सरकार के ताबड़तोड़ फैसलों से सहारनपुर को काफी उम्मीदें हैं, मगर सरकार गठन के डेढ़ महीने बाद भी जिले को लेकर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

उत्तराखंड और हरियाणा से घिरे हुए सहारनपुर में पिछली सरकारों ने कुछ परियोजाओं को मंजूरी दी थी, मगर आपसी द्वंद्व के चलते ज्यादातर परियोजनाएं और विकास कार्य अधूरे पड़े हैं।
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इसके अलावा यहां की कई प्रस्तावित योजनाएं भी शासन में मंजूरी के लिए फाइलों में दबी पड़ी हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सहारनपुर में अब तक पेजयल, सड़क और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। 

गांवों को शुद्ध पेयजल पहुंचाने से लेकर प्रमुख सड़कों के सुंदरीकरण की योजनाएं हैं, जिन्हें पूरा होने के लिए योगी सरकार की मंजूरी का इंतजार है।  उधर, सहारनपुर में लंबे समय से बाईपास की मांग उठ रही है।

मगर, दृढ़ इच्छाशक्ति नहीं होने के कारण अब तक यह प्रस्ताव पूरी तरह से कागजों में ही सिमटा है। यही कारण है कि पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड को जाने वाला पूरा ट्रैफिक शहर के बीच से होकर गुजरता है। 

हालांकि बाईपास को लेकर कागजी तैयारी पूरी कर ली गई है। मगर, जमीन अधिग्रहण से लेकर और कामों तक में कोई प्रगति नहीं हो पाई। नेशनल हाईवे का बाईपास बनाने को केन्द्र सरकार ने छुटमलपुर से सरसावा तक के रोड को मंजूरी दी है।

मगर, अभी यह परियोजना जमीन अधिग्रहण नहीं होने से उलझी है। जमीन अधिग्रहण का पूरा काम स्थानीय प्रशासन को करना है। इसके अलावा दिल्ली रोड से जुड़ते हुए प्रस्तावित बाईपास को मंजूरी का इंतजार है।

अखिलेश सरकार ने अपने कार्यकाल के चौथे साल में मुजफ्फरनगर-सहारनपुर फोरलेन को मंजूरी दी थी। इस फोरलेन सड़क में पूरे देवबंद कस्बे पर फ्लाईओवर का निर्माण प्रस्तावित है।

इसके अलावा यह सड़क मुजफ्फरनगर-देवबंद-नागल होते हुए गागलहेड़ी से देहरादून नेशनल हाईवे से जुड़ जाएगी। ऐसे में शहर में जाने वाले ट्रैफिक के राहत के साथ लोगों को भारी सुविधा मिलेगी।

अखिलेश सरकार ने इस परियोजना को काफी तवज्जो दी और करीब 70 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए पर्याप्त धन आवंटित किया। यही कारण है कि देवबंद में बनने वाले करीब चार किलोमीटर लंबे पुल का काफी हद तक काम हो गया।

मगर, चुनाव के दौरान से इस सड़क का निर्माण कार्य रुक सा गया है। ऐसे में सड़क पूरी तरह अधूरी होने के साथ ही पहले से बनी सड़क पूरी तरह से टूट चुकी है। राहगीरों का यहां चलना ही मुश्किल हो गया है। इस परियोजना को काम पूरा करने के लिए धन की दरकार है।

बसपा शासनकाल में मंजूर हुआ राजकीय मेडिकल कालेज अब तक केवल नाम की राजनीति में उलझा हुआ है। बसपा शासनकाल मे इसका नाम मान्यवर कांशीराम राजकीय मेडिकल कालेज था।

इसके बाद शासनकाल में पहले तो तैयार हुए इस मेडिकल कालेज की अनदेखी की गई। बाद में इसका नाम शेखुल हिंद मौलाना महमूदउल हसन राजकीय मेडिकल कालेज किया गया। यहां अब तक केवल ओडीपी की सुविधा ही मुहैया हो रही है।

हालांकि मेडिकल कालेज में सत्र शुरू हो गया है। मगर सुविधाओं के नाम पर यहां हर चीज का पूरी तरह से टोटा है। वर्तमान सरकार के गठन के बाद सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने मेडिकल कालेज का नाम कांशीराम के नाम करने के साथ ही इसमें एम्स जैसी सुविधा के लिए मुख्यमंत्री से मांग की थी। ऐसे में इसे भी अपने दिन बहुरने का इंतजार है। लोगों को भी इसका इंतजार है जिससे उन्हें चिकित्सा सुविधा मिल सके।

बसपा शासनकाल में करीब 200 करोड़ रुपये के बजट से तैयार होने वाला स्पोर्ट्स कालेज पूरी तरह से सियासत की भेंट चढ़ा हुआ है। इस स्पोर्ट्स कालेज में 50 फीसदी से ज्यादा काम हो चुका है।

मगर, पिछले पांच साल में यहां एक ईंट भी नहीं रखी गई। स्पोर्ट्स कालेज के निर्माण से प्रदेश के खेल से जुड़ी प्रतिभाएं निखरेंगी। यमुना किनारे अर्धनिर्मित इस कालेज की इमारत में तैयार होने के बाद उचित रख-रखाव में जर्जर होती जा रही है। योगी सरकार इस बिल्डिंग को किसी और रुप में भी उपयोग कर सकती है।

लंबित पड़ी परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट मंगाई जा रही है। जनता से जुड़े विकास कार्य को पूरा करने के लिए अधिकारी पूरी क्षमता से काम करेंगे। इसके लिए पूरी तरह विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है।
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- एमपी अग्रवाल, मंडलायुक्त




 
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