सहारनपुर। गलत खानपान, वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने से इसका असर गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं पर पड़ रहा है। प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म धूलकण से खून में ऑक्सीजन घट रही है। यही वजह है कि प्रसव समय से पहले हो रहे हैं, जो बच्चों की प्रतिरोक्षक क्षमता पर प्रभाव डाल रहा है।
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. इंद्रा सिंह ने बताया कि हर महीने 800 से 1000 सामान्य और ऑपरेशन से प्रसव होते हैं। इनमें से 10 प्रतिशत प्रसव प्रीमच्योर (समय से पूर्व) हो रहे हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें महिलाओं का गलत खानपान, वायु प्रदूषण, हाइपरटेंशन, डायबिटीज, गुर्दे की बीमारी आदि शामिल हैं। किसी में अनुवांशिक कारण भी होते हैं। उनका कहना है कि हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से खून में ऑक्सीजन का स्तर घट जाता है। इससे भ्रूण तक पोषण और ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित होती है। इस कारण गर्भ में पल रहे शिशु का विकास धीमा पड़ जाता है। कई मामलों में समय से पहले प्रसव या कम वजन के शिशु जन्म लेते हैं।
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जन्म के पहले माह में बाहर ले जाने से बचें
जिला महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनदीप सिंह का कहना है कि जन्म के बाद खांसी, जुकाम, आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण बढ़ते हैं। नवजात का प्रतिरोधक तंत्र पूरी विकसित नहीं होता है, इसलिए जन्म के पहले माह में शिशु को खुले में ले जाना बेहद घातक हो सकता है।
ऐसे करें बचाव
- गर्भवती महिलाएं घर से बाहर निकलने पर मास्क का प्रयोग करें।
- घर की खिड़कियां-दरवाजे बंद रखकर प्रदूषण का असर कम करें।
- सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या थकान महसूस हो तो चिकित्सक से सलाह लें।
- नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह के बिना दवाओं का सेवन न करें।