सहारनपुर। भारतीय जनता पार्टी अपने विधायकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार कर रही है। पार्टी गोपनीय तरीके से सर्वे करा रही है, जिसमें जनता से जाना जा रहा है कि किस विधायक ने क्षेत्र में कितना काम किया है। कौन जनता के बीच अधिक रहता है। जनता की पहली पसंद कौन है और उसकी छवि कैसी है। यही रिपोर्ट कार्ड आगामी विधानसभा चुनाव में उनको टिकट मिलना या न मिलना तय करेगा।
प्रदेश की सत्ता में दो बार पूर्ण बहुमत से काबिज भारतीय जनता पार्टी इस बार के चुनाव में भी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। विधानसभा चुनाव की तैयारियों में लगी पार्टी अभी से होमवर्क कर रही है। जिले की सातों विधानसभा सीटों पर सर्वे कराया जा रहा है। यानी जिस विधान सभा में भाजपा का विधायक नहीं है वहां उन लोगों का सर्वे हो रहा है, जो टिकट के लिए दावेदारी करने वाले हैं। एजेंसियों के माध्यम से कराए जा रहे सर्वे में जनप्रतिनिधियों द्वारा किए गए कार्यों और जनता की राय को शामिल किया जा रहा है। पार्टी सूत्रों की मानें तो एक सर्वे पहले हो चुका है। इसकी रिपोर्ट पार्टी आलाकमान को भेजी जा चुकी है। एक सर्वे अभी चल रहा है।
इसके बाद यदि चुनाव समय से पहले मतलब की नवंबर या दिसंबर में होते हैं तो एक सर्वे अगस्त-सितंबर में कराया जाएगा। वहीं, चुनाव के अपने तय समय पर होने की स्थिति में सर्वे नवंबर-दिसंबर में होगा। सर्वे में एजेंसी के लोग अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर लोगों की राय जान रहे हैं। आमजन से पूछा जा रहा है कि 2022 में किसे वोट दिया था। 2024 में किस पार्टी को वोट दिया। केंद्र और प्रदेश सरकार के काम से कितने संतुष्ट, उम्मीदवारों पर रायशुमारी आदि।
- मोदी लहर में चार तो 2022 में जीती भाजपा ने पांच सीट
भारतीय जनता पार्टी ने 2017 के विधानसभा चुनावों में जिले की सात में से चार सीटों पर कब्जा किया था। इसके बाद 2022 में हुए चुनावों में पार्टी ने अपने प्रदर्शन को सुधारते हुए एक सीट की बढ़ोतरी की और पांच सीटों पर जीत दर्ज की। हालांकि इसमें तीन सीटें ऐसी थी, जहां पर टक्कर कांटे की थी। अंतिम राउंड तक जीत पर संशय बना रहा। इसमें नकुड़, देवबंद और सहारनपुर नगर सीट शामिल हैं। पार्टी इस बार इस तरह का जोखिम नहीं उठानी चाहती।
- संगठन और मजबूत करने में जुटी पार्टी
भारतीय जनता पार्टी अपने संगठन को मजबूत करने में भी जुटी है। फरवरी के अंत में पार्टी ने जिलाध्यक्षों की घोषणा की है। वहीं मार्च में पार्टी की ओर से नगर पालिकाओं और नगर निगम में पुराने कार्यकर्ताओं को सम्मान देते हुए सभासद और पार्षद मनोनीत किया गया। वहीं मंडल अध्यक्षों की भी नियुक्ति भी हाल ही में की गई हैं। इन सभी संकेतों से साफ है कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।