सहारनपुर। अपनी परंपरागत कारीगरी के लिए विख्यात जनपद के काष्ठ हस्तशिल्प उत्पाद पूरे विश्व में धूम मचा रहे हैं। यह उद्योग न सिर्फ एक लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दे रहा है, बल्कि प्रतिवर्ष लगभग 900 से 1200 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा भी अर्जित करता है। कई परिवारों की पीढ़ी दर पीढ़ी काष्ठ हस्तशिल्प उद्योग से जुड़ी हुई है।
जनपद में काष्ठ हस्तशिल्प उद्योगों को 250 से 300 वर्ष पुराना माना जाता है। कुछ लोगों का मानना है कि यह उद्योग मुगल काल से ही जनपद में शुरू हो गया था। कई उद्यमियों का कहना है कि काष्ठ हस्तशिल्प की नक्काशी का यह विश्व प्रसिद्ध कारोबार कश्मीरियों के संपर्क में आकर शुरू हुआ था। हालांकि कुछ इसे मुगलकाल से शुरू होना मानते हैं। जनपद में कई परिवार ऐसे हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी इस कारोबार से जुडे़ हैं। यहां पर काष्ठ हस्तशिल्प तैयार करने वाले करीब 2500 छोटी बड़ी इकाइयां स्थापित हैं। जनपद से काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों का 1400 से 1500 रुपये वार्षिक का कारोबार है, जबकि 900 से 1100 करोड़ रुपये तक काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों का दुनिया के कई देशों में निर्यात होता है।
काष्ठ हस्तशिल्प से जुड़ी चौथी पीढ़ी
हमारे दादा अमीर अहमद ने रुड़की विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग करने के बाद वर्ष 1936 में काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादन की इकाई स्थापित की थी। इसमें परंपरागत तरीके से हाथ से ही लकड़ी पर नक्काशी कर उत्पाद तैयार किए जाते हैं। उसके बाद पिता जमील अहमद ने कारोबार संभाला। अब बेटा उबैदुर्रहमान इस काम को आगे बढ़ा रहा है। अधिकांश उत्पाद सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज कारपोरेशन खरीद लेता है। --- अब्दुल रहमान, राष्ट्रप्रति पुरस्कार से सम्मानित उद्यमी।
अपनाया परंपरागत कारोबार
पिता अनवर अहमद ने काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों के निर्माण का कारोबार 1962 में स्थापित किया था। इसमें परंपरागत तरीके से नक्काशी से लेकर अन्य कार्य किए जा रहे हैं। विदेशी बाजार को देखते हुए क्रिसमस के दौरान बिकने वाले कई आइटम और अन्य परंपरागत काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों का निर्माण कराया जा रहा है। --- दानिश अनवर, उद्यमी एवं निर्यातक।
250 वर्ष से अधिक पुराना कारोबार
जनपद में काष्ठ हस्तशिल्प कारोबार 250 वर्ष से भी अधिक पुराना है। यहां पर इसकी शुरूआत कंघी, पार्टीशन सहित अन्य उत्पादों के निर्माण से हुई। आज पूरी दुनिया में यहां के काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों का डंका बज रहा है। एक लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार दे रखा है।
- आरिफ खान, महासचिव हैंडीक्राफ्ट्स आर्टीजन एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन।
विश्व के कई देशों में होता है निर्यात
जिले से वुड कार्विंग उत्पादों का निर्यात विश्व के कई देशों में होता है। इनमें अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, स्वीडन, आस्ट्रेलिया, डेनमार्क, नीदरलैंड, दक्षिणी अफ्रीका, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात, सउदी अरब, रूस, यूक्रेन आदि देश शामिल हैं।
अब्दुल रहमान- फोटो : SAHARANPUR
वुड कार्विंग कारोबारी आरिफ खान- फोटो : SAHARANPUR
वुड कार्विंग की नकासी करते करते कारीगर- फोटो : SAHARANPUR
वुड कार्विंग की आइटम- फोटो : SAHARANPUR