सहारनपुर। पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के चतुर्थ दिवस पर युवराज आदि कुमार के तप और दीक्षा कल्याणक क्रियाएं श्रद्धाभाव से संपन्न हुईं। इसके साथ ही श्रीजी का अभिषेक किया गया। भजनों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
महावीर कॉलोनी में चल रहे कार्यक्रम में सर्व प्रथम जैन मुनियों ने महाभिषेक, शांतिधारा और पूजन कराया। प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी प्रदीप सुयश और संगीतकार नीलेश जैन ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। जैन मुनि वीर सागर महाराज ने कहा कि कर्म भूमि में कर्म की प्रधानता होती है। सम्यक कर्म से ही जीव अपना कल्याण कर सकता है। गुरु की दृष्टि अपार एवं असीम होती है। गुरु सदैव जीवों के कल्याण के बारे में सोचते हैं। पंचमकाल में मानव का उद्देश्य संयम धारण करने का होना चाहिए। मानव चिंतन आत्मतत्व की ओर होना चाहिए। जीव की जीवन यात्रा भोग-भूमि से कर्म भूमि की ओर होनी चाहिए। तीर्थंकर वैराग्य होने पर तीनों लोकों का वैभव एक ही क्षण में छोड़कर संयम धारण कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि पहले 12 भावनाओं का अंदर से चिंतन करने पर जीव भवन से वन की ओर निकल पड़ते थे। वर्तमान में जीव 12 भावना के चिंतन करने पर भी सांसारिक कार्यों में सक्रियता से संलग्न हो जाते हैं। युवराज आदि कुमार के राज्यभिषेक व दीक्षा का दृश्य बहुत ही सजीव, मौलिक एवं वास्तविक है। कार्यक्रम में जैन मुनियों ने युवराज आदि कुमार को दीक्षा के संस्कार प्रदान किए गए। इसके साथ ही देवों द्वारा आदि कुमार के संयम धारण करने की अनुमोदना का दृश्य भी अद्भुत एवं अलौकिक रहा। इस दौरान मुख्य संयोजक राकेश जैन, जैन समाज के अध्यक्ष राजेश जैन, महामंत्री संजीव जैन, मीडिया प्रभारी सीए अनिल जैन, संजीव जैन, विपिन जैन, चौधरी संदीप जैन, प्रकाम जैन, संजीव जैन, देवजैन, मुकेश जैन, अशोक जैन, मनीष जैन ,नवीन जैन, मानसिंह जैन, मनोज जैन, संजय जैन जयदीप जैन, संदीप, आयुष जैन राजा, सुरेश जैन, वैभव जैन, गिरीश जैन, विजय जैन, अभिषेक जैन, दीपक जैन, देव भगत बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग मौजूद रहे।