बेहट विधायक महावीर सिंह राणा के भाजपा में शामिल होने पर क्षेत्र में उनके समर्थकों में खुशी की लहर है। जीवाला में उनके पैतृक आवास पर भी एक दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी गई।
इसी साल 23 मई को पूर्व सांसद जगदीश सिंह राणा के भाजपा में शामिल होने के बाद से ही यह कयास लगने शुरू हो गए थे कि उनके भाई एवं बेहट विधायक महावीर सिंह राणा भी देर सवेरे भाजपाई हो जाएंगे। उनके समर्थक इसके लिए तैयार भी थे। उनके समर्थक भाजपा के कार्यक्रमों में भी खुले तौर पर बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने लगे थे।
आखिर साढ़े तीन माह के इंतजार के बाद आखिर महावीर सिंह राणा ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण करते हुए कमल खिलाने का संकल्प ले लिया। उनके लखनऊ में भाजपाई होते ही यहां बेहट क्षेत्र में उनके समर्थकों में उत्साह छा गया। कई जगहों पर ढोल नगाड़ों के साथ विधायक के भाजपाई होने की खुशी मनाई गई।
लखनऊ में भाजपा कार्यालय पर विधायक के साथ मौजूद रहने वालों में नागल ब्लाक प्रमुख बिजेंद्र चौधरी, जिला पंचायत सदस्य सुशील राणा एवं राजकुमार, जिला पंचायत सदस्य एवं पूर्व प्रमुख मुल्कीराज सैनी, प्रधानाचार्य विजय बहादुर, राजबीर सिंह डायरेक्टर, प्रधान धर्मपाल कश्यप, महिपाल सैनी बीडीसी, धीरज सिंह प्रधान नगला, गन्ना समिति के चेयरमैन भोपाल सिंह, उप प्रमुख महेंद्र सिंह चौहान, गुरदीप प्रधान मलायण, व्यापार मंडल बेहट अध्यक्ष मोहित जैन, प्रदीप बीडीसी, अनिल शर्मा प्रधान कासमपुर, यज्ञपाल सिंह उर्फ बोकी आदि शामिल रहे। राणा के समर्थकों ने खुशी जताई है।
बसपा को हो सकता है नुकसान
महावीर राणा के भाजपा में शामिल होने की अटकलें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली से पूर्व ही लगाई जा रहीं थी। उनके बड़े भाई और पूर्व सांसद जगदीश राणा रैली से कुछ ही समय पूर्व ही बसपा से निकाले जाने के बाद भाजपा में शामिल हो गए थे। उसके बाद से विधायक महावीर राणा को भी बसपा में तरजीह नहीं दी जा रही थी। पहली बार बेहट से विधायक बने महावीर राणा मई से ही भाजपा में शामिल होने के प्रयास में थे।
जिले में मजबूत राजनीतिक पकड़ रखने वाले पूर्व सांसद जगदीश राणा पहले समाजवादी पार्टी में थे। 2002 से 2007 तक सपा में विधायक एवं मंत्री रहे। लेकिन इमरान मसूद के सपा में आने के बाद उनको सपा छोड़ बसपा ज्वाइन कर ली और 2009 के लोक सभा चुनाव में बसपा के टिकट पर जीतकर संसद पहुंचे। उसके बाद उन्होंने अपने भाई महावीर राणा को 2012 में बसपा के टिकट पर बेहट से विधानसभा चुनाव में मैदान में उतारा और विधायक बनवाया।
सैफई में हुए विरोधी दल के एक कार्यक्रम में मंच साझा करने की वजह से जगदीश राणा को बसपा ने निष्कासित कर दिया गया। महावीर राणा के भी भाजपा में शामिल होने से बसपा को बड़ा झटका लगा है। दोनों भाइयों की क्षेत्र की राजनीति में काफी अच्छी पकड़ है। पहले सपा में रहते हुए सीट निकाली और फिर बसपा में रहकर जीत हासिल की। ऐसे में दोनों भाइयों के बसपा छोड़ने से बसपा को नुकसान हो सकता है।