सहारनपुर। मंडल में गन्ना बुवाई चल रही है। ऐसे में किसानों को उन्नतशील प्रजातियों का बीज उपलब्ध कराने के लिए पौधशालाओं से लेकर खेतों में करीब 92 लाख क्विंटल बीज को आरक्षित कराया गया है। पिछले पेराई सत्र में गन्ने के रकबे में बढ़ोतरी हुई थी।
सीओ 0238 प्रजाति में रेडरॉट रोग का असर है। इस बीमारी को गन्ने का कैंसर माना जाता है। इसका सबसे अधिक प्रकोप गन्ने की 0238 प्रजाति पर दिखाई दिया। बीमारी से गन्ने की काफी फसल प्रभावित हुई। इससे प्रभावित फसल की तीसरी एवं चौथी पत्तियां पीला पड़ने लगती हैं। प्रभावित गन्ने की पोरी काटने पर अंदर का हिस्सा लाल रंग का दिखाई देता है, जिसमें बीच-बीच में सफेद धब्बे रहते हैं। प्रभावित गन्ने को काटने पर उसमें से एल्कोहल जैसी गंध आती है। इस रोग से प्रभावित फसल की उत्पादकता में भारी कमी हो जाती है।
इसी के चलते पिछले दो वर्षों से अधिक में गन्ना विभाग नई प्रजातियों की बुवाई कराने में लगा है। इसके लिए सहारनपुर में करीब 29.50 लाख क्विंटल, मुजफ्फरनगर में 49.74 और शामली में तकरीबन 13 लाख क्विंटल बीज आरक्षित किया गया है। बीज आरक्षित करने के लिए कई चीनी मिलें किसानों को प्रोत्साहन राशि भी दे रही हैं। मिलों की प्रोत्साहन राशि 25 रुपये से लेकर 100 रुपये प्रति क्विंटल तक अलग-अलग है। किसान गन्ना विभाग की पौधशालाओं से भी बीज प्राप्त कर सकते हैं।
उन्नतशील प्रजातियों पर जोर
किसानों को नई उन्नतशील अन्य प्रजातियों का वितरण किया जा रहा है। इन प्रजातियों में अगेती में कोलक-14201, को-15023, कोशा-13235,कोशा-13231 आदि प्रजातियां शामिल हैं।
पेराई सत्र 2025-26 में बढ़ा रकबा
सहारनपुर में गन्ना रकबा 1,384 हेक्टेयर बढ़कर 1,19,406 हेक्टेयर पहुंच गया है। जनपद में पिछले वर्ष 1,18,022 हेक्टेयर में गन्ने की फसल हुई थी। जिले में रकबे में 1.21 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। शामली में गन्ने का रकबा 3,063 हेक्टेयर बढ़कर 79,058 हेक्टेयर रहा। मुजफ्फरनगर में 1,76,916 हेक्टेयर गन्ने का रकबा रहा।
वर्जन
मंडलभर के किसानों को उन्नतशील प्रजातियों की बुवाई करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए बीज को भी आरक्षित किया गया है। वर्तमान में वसंतकालीन गन्ना बुवाई चल रही है।
- ओपी सिंह, उप गन्ना आयुक्त