सहारनपुर। समय पर गन्ना मूल्य भुगतान कराने के शासन प्रशासन की तमाम प्रयास विफल साबित हो रहे हैं। इसके चलते जिले की छहों चीनी मिलों पर करीब 350 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया हो गया है। इसके अलावा बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज भी 1.59 करोड़ हो गया है।
शासन प्रशासन की तमाम कवायद के बाद भी किसानों को समय पर गन्ना मूल्य नहीं मिल पा रहा है। साथ ही नियम होने के बाद भी शुगर मिलें किसानों को बकाया गन्ना मूल्य पर देय ब्याज का भुगतान करने मेें कोताही बरत रहीं हैं। इस बार अब तक बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज करीब 1.59 करोड़ रुपये हो गया है। मिल में गन्ना सप्लाई करने के 14 दिनों के अंदर गन्ना मूल्य का भुगतान करने का प्रावधान है। इसके बाद भुगतान होने पर बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज देने का प्रावधान भी है। इसकी व्यवस्था शुगर केन कंट्रोल आर्डर 1966 के उपबंध-3,3ए में की गई है। इसके बावजूद भी किसान बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज से महरूम रहते हैं। गांव बुड्ढाखेड़ा गुर्जर के कल्याण सिंह एवं सहजी के बिट्टू नंबरदार आदि किसानों का कहना है कि गन्ना विभाग को बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज दिलाना सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब किसान बैंक आदि से लिए ऋण पर ब्याज देते हैं तो उन्हें भी बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज मिलना चाहिए। जिला गन्ना अधिकारी कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी ने बताया कि समय पर भुगतान नहीं करने वाली चीनी मिलों पर सख्ती की जा रही है। गन्ना समितियों की ओर से बकाया गन्ना मूल्य पर देय ब्याज का भुगतान करने के लिए संबंधित मिलों को नोटिस एवं बिल भेजे जा रहे हैं।