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Saharanpur News: चीनी मिल दबाए बैठी किसानों का 211 करोड़, फीकी हुई त्योहारों की रौनक

Tue, 03 Mar 2026 11:35 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
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सहारनपुर। जिले की चीनी मिल किसानों का 211.58 करोड़ रुपये दबाए बैठी हैं और गन्ना किसान पाई पाई को तरस रहा है। बिना पैसों के होली और ईद पर रौनक नहीं दिखाई दे रही है।
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किसानों की परेशानी है कि त्योहार तो चलो जैसे तैसे करके मना लेंगे, लेकिन बिना रुपये न तो उच्च शिक्षा ले रहे बच्चों की फीस जा पा रही है और न ही शादी ब्याह की तैयारियां कर पा रहे हैं। अगली फसल की लागत के लिए भी साहूकारों का मुंह ताकना पड़ रहा है। जिले की आठ चीनी मिलों में सबसे ज्यादा बकाया बजाज शुगर मिल गांगनोली पर 120 करोड़ रुपये है। इसके बाद किसान सहकारी चीनी मिल नानौता पर 50.71 करोड़, द किसान कोऑपरेटिव चीनी मिल सरसावा पर 28.36 करोड़ और दया शुगर मिल गागलहेड़ी पर 21.21 करोड़, बिडवी शुगर मिल पर 11.56 करोड़ और शेरमऊ चीनी मिल पर 7.73 करोड़ रुपये किसानों का गन्ना भुगतान बकाया है।



- नागल क्षेत्र के गांव बढेडी कोली निवासी सीटू चौधरी का कहना है कि उनकी मुख्य खेती गन्ना है, लेकिन शुगर मिल गन्ने का भुगतान नहीं कर रहा है। इसके कारण उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दो बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जिनकी फीस भी ज्यादा है। सामाजिक संस्कार भी हैं और अगली फसल में लागत भी लगानी है। इन सबके लिए पैसे की जरूरत है।
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- गांव इसाकपुर निवासी पलटू राम का कहना है कि अभी हाल ही में बहन के यहां शादी में भात भरा है। बच्चों की फीस भी बाकी है जो अभी जमा करनी है। खेत में लागत भी देनी है। बजाज शुगर मिल गन्ना भुगतान नहीं कर रहा है। अपने खर्च तक चलाने के लिए इधर उधर से पैसे उधार लेने पड़ रहे हैं। होली का त्योहार भी बिना पैसे फीका ही रहा है।

- बड़गांव क्षेत्र के गांव सिरसली कला निवासी किसान डाॅ. इश्तकार का कहना है एक ओर गन्ने की पैदावार में पहले से कमी आ रही है। गन्ने की खेती में काफी दवाइयां लगानी पड़ रही है जिससे लागत भी ज्यादा आ रही है। इसके बाद भी समय से भुगतान नहीं होता है। पवित्र रमजान का महीना चल रहा है। बकाया गन्ना भुगतान समय पर न मिलने से ईद का त्योहार भी फीका ही रहेगा।

-गांव बुढेड़ा निवासी सुखविंद्र सिंह का कहना है कि फरवरी माह में बेटी की शादी की थी। गन्ना भुगतान नहीं मिलने से काफी परेशानी हुई। मिल किसानों का पैसा दबाए बैठी रहती है। जबकि किसानों को बीज, खाद आदि बाजार से नकद लेना पड़ता है।
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