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स्कूल, कॉलेजों में ऑफलाइन पढ़ाई को लेकर छात्र-छात्राएं उत्साहित

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सहारनपुर। कोरोना संक्रमण का खतरा लंबे अंतराल बाद टला है। ऐसे में छात्र छात्राओं, अभिभावकों और शिक्षकों को दो साल की पढ़ाई का गैप दूर करना चुनौती से कम नहीं है। शुक्रवार को नया सत्र शुरू हुआ तो भविष्य को लेकर बच्चों को आशा की नई किरण नजर आई। इस बार काफी दिनों बाद वर्चुअल की जगह एक्चुअल (ऑफलाइन) पढ़ाई से छुटकारा मिला है। मानसिक तनाव से उबरने का मौका मिलेगा। विद्यार्थियों के अलावा अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर उत्साह से भरे है। बच्चों की मम्मी इस बात को लेकर राहत के है, उन्हें बच्चों को स्कूल भेजकर घरेलू कामकाज निपटाने का मौका मिलेगा। बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए शिक्षक पिछली भरपाई को पूरा करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करने को तैयार है। गुणवत्तापरक शिक्षा के लिए बातचीत में अभिभावकों और शिक्षकों की जुबानी पर एक रिपोर्ट।
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वर्चुअल पढ़ाई में आई नीरसता, लेकिन अब उत्साह
मुजफ्फराबाद के टांडा पुरु प्राथमिक स्कूल के सहायक अध्यापक संदीप कुमार का कहना है कि वर्चुअल पढ़ाई के दौरान बच्चों में नीरसता आई है। शिक्षक और अभिभावक इसे लेकर परेशान हैं। बगैर परीक्षा बच्चों को प्रमोट करने का रवैया भी उनकी क्षमता के प्रति अन्याय है। इससे बच्चे भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए पिछड़ गए। नए सत्र में भौतिक पठन पाठन को लेकर अध्यापक और बच्चों में खासा उत्साह है।
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तनाव, डर और अनुशासनहीनता से निकालना होगी चुनौती
जनहित इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य राज कुमार सैनी का कहना है कि कोरोना काल में स्कूल बंद रहने से बच्चों का शिक्षण कार्य तो प्रभावित हुआ ही है, साथ ही घर पर रहने से उनकी मानसिकता भी बदली है। लंबे समय से स्कूल से दूर रहने पर बच्चों में मानसिक तनाव और डर की स्थिति पैदा हुई है। अनुशासन का भी अभाव हुआ है। नए सत्र में इन सभी परिस्थितियों से बच्चों को बाहर निकालने की चुनौती भी रहेगी।
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पढ़ने की आदत छूटी, रिजल्ट हो रहा प्रभावित
गांव हलवाना निवासी दिल्ली पब्लिक स्कूल में कक्षा दस के छात्र विदित ने बताया कि दो साल तक स्कूल बंद रहने से पढ़ाई का खासा नुकसान हुआ है। क्लास में बैठ कर लगातार पढ़ने की आदत भी छूट गई है। घर पर भी पढ़ाई का माहौल नहीं मिल पाता है। लिखने की आदत छूट गई, इसके चलते प्री बोर्ड में वह निर्धारित समय में पूरा पेपर साल्व नहीं कर पाया है। इसके चलते रिजल्ट भी प्रभावित हुआ है।
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स्कूल खुलने से मिली अभिभावकों को राहत
छुटमलपुर की शिव कॉलोनी निवासी मनोज माहेश्वरी ने बताया कि उनका बेटा जवाहर नवोदय अंबेहटा चांद में पढ़ता है। बीते दो साल तक घर रहने के दौरान बतौर अभिभावक काफी परेशान रहे हैं। घर पर उसे पढ़ाई का माहौल नहीं मिला। अब स्कूल खुलने के बाद बेटा हॉस्टल चला गया है। स्कूल खुलने से उन्हें काफी राहत मिली है। इस बार गर्मी की छुट्टी भी नहीं होगी। उम्मीद है कि शिक्षकों के समन्वय और प्रयास से बच्चे के नुकसान की भरपाई हो जाएगी।
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