सहारनपुर। मार्च, अप्रैल और अब मई की शुरुआत में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से आम की फसल को खासा नुकसान पहुंचा है। मौसम का असर है कि इस बार करीब 40 फीसदी आम की फसल प्रभावित हुई है। आगे भी मौसम में बदलाव रहा तो इस बार आम आमजन के लिए आम न होकर खास होगा। बागवानों का मानना है कि इस बार आम के दाम भी अधिक रह सकते हैं।
जिले में आम का रकबा नौ वर्षों में बढ़कर 27 हजार हेक्टेयर से अधिक हो गया है। बेहट को आम की फल पट्टी माना जाता है। इसके अलावा नानौता, तीतरो, रामपुर मनिहारान, गंगोह आदि में भी आम के बाग हैं। अप्रैल के शुरुआती पखवाड़े में मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहा। इसके बाद 15 अप्रैल से 25 अप्रैल के बीच गर्मी ने अपने तेवर दिखाए। अधिकतम तापमान भी 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इसके बाद फिर से आंधी और ओलावृष्टि हुई। आंधी के चलते जो फल आया था वह टूटकर गिर गया। जिले के आम की किस्म चौसा, लंगड़ा और दशहरी की मांग देश ही नहीं विदेश में भी होती है। बारिश और आंधी से आम की गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा। इससे आम के निर्यात में भी परेशानी होगी।
बोले कारोबारी
इस बार बेमौसम बारिश, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि ने क्षेत्र में आम की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। इससे आम उत्पादन में 30 से 40 प्रतिशत या इससे ज्यादा कमी आने की संभावना बढ़ गई है। इस बार बाजार में आम के भाव में तेजी रह सकती है।
साजिद हसन, आम कारोबारी
क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से तेज हवाओं के साथ लगातार हो बारिश व ओलावृष्टि के कारण आम की लगभग 80 प्रतिशत तक फसल बर्बाद हो गई है, पिछले कुछ वर्षों में कभी ऐसा नहीं हुआ। आम उत्पादकों व बागवानों को प्रशासन मुआवजा प्रदान करें।
- बागवान रामवीर सिंह चौहान, निवासी ग्राम काशीपुर नानौता
बागवान इमरान दलहेड़ी का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में कभी आंधी तो कभी ओलावृष्टि, कभी लू जैसा मौसम बना रहा तो बागों पर इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा। क्योंकि जो आम अच्छा स्वस्थ था वह तेज आंधी-तूफान में नीचे गिर गया है। बाकी को ओलावृष्टि ने खराब कर दिया है।
फतेहपुर भादों निवासी बाग ठेकेदार अब्दुल वाजिद ने बताया कि इस बार पहले चेपा रोग ने बाग की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया। कई-कई स्प्रे करने के बाद भी बीमारी नहीं गई। अब ओलावृष्टि और आंधी फसल को बर्बाद कर रही है।