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मानवता शर्मसार: स्ट्रेचर न मिला, पिता की लाश को गोद में लेकर चला बेटा, नहीं पसीजा किसी का दिल, रुला देगी खबर

Tue, 12 Sep 2023 11:33 PM IST
मेरठ ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर

सार

Saharanpur News : यूपी के सहारनपुर से मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल में मौत के बाद स्ट्रेचर न मिला तो बेटा अपने पिता की लाश को गोद में लेकर ही चल दिया। इस दौरान किसी का दिल नहीं पसीजा।
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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सहारनपुर में राजकीय मेडिकल कॉलेज में एक बेटा अपने पिता की लाश को लेकर भटकता रहा। लेकिन पिता को ले जाने के लिए स्ट्रेचर नहीं मिला। इस घटना ने मानवता को शर्मसार कर दिया। बाद में बेटे ने खुद ही पिता को गोद में उठाया और चल दिया। चिकित्सकों पर अभद्र करने का भी आरोप लगाया।

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बड़गांव क्षेत्र के गांव महेश्वर निवासी घनश्याम (80) को लेकर बेटा कुलदीप सिंह देवबंद के एक निजी अस्पताल में पहुंचा। तबीयत अधिक खराब होने के चलते चिकित्सकों ने उसे रेफर कर दिया।

इसके बाद परिजन उसे शहर के दो निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां उन्हें बेड नहीं होने की बात कहकर भर्ती करने से मना कर दिया। परिजन जैसे-तैसे कर राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंचे। चिकित्सक को दिखाने के लिए घंटों तक बैठे रहे। उन्होंने एक जनप्रतिनिधि से फोन कर सिफारिश लगवाई तो कॉलेज प्रबंधन हरकत में आया। भर्ती कर लिया, लेकिन कुछ देर बाद ही घनश्याम की मौत हो गई।

मौत के बाद परिजन स्ट्रेचर के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज में इधर-उधर भटकते रहे। स्ट्रेचर कहीं नहीं मिला। इसके बाद बेटे ने बेड से पिता की लाश को उठाया और गोद में लेकर चल दिया, लेकिन स्टाफ का दिल नहीं पसीजा।

परिजनों ने आरोप लगाया कि उनके साथ चिकित्सकों ने भी ठीक व्यवहार नहीं किया। मानवता को शर्मसार करने वाली घटना ने राजकीय मेडिकल कॉलेज की पोल खोलकर रख दी। इस घटना का 38 सेकेंड का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।

बेटा बोला- मेडिकल कॉलेज में ठीक नहीं व्यवस्था
बेटे कुलदीप सिंह का कहना है कि उनके पिता दिल की बीमारी से ग्रसित थे। जिन्हें दिखाने के लिए वह मेडिकल कॉलेज पहुंचे, लेकिन यहां सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। कई सौ करोड़ रुपये की बिल्डिंग केवल नाम की है।

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मामला उनके संज्ञान में है। जिस समय परिजन मरीज को लेकर पहुंचे। वह खुद वहां मौजूद रहीं। मृतक को ले जाने के लिए स्ट्रेचर दिया गया, लेकिन परिजन परेशान थे। किसी के साथ कोई अभद्र व्यवहार नहीं किया गया। उन्होंने सभी चिकित्सकों और स्टाफ को निर्देश दिए कि मरीजों को बेहतर से बेहतर इलाज मिले। - डॉ. संगीता अनेजा, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज

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