सहारनपुर। जंगलों की रखवाली करने वाले वन कर्मियों की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जो निर्देश सरकार को दिए हैं, उससे सहारनपुर सामाजिक वानिकी में कार्यरत कर्मियों को लाभ होगा। क्योंकि सामाजिक वानिकी के पास वन कर्मियों के लिए सिर्फ एक बंदूक है, जबकि 50 से ज्यादा कर्मी कार्यरत हैं। हालांकि शिवालिक वन कर्मियों के पास असलहा हैं।
दरअसल, सहारनपुर जिले में शिवालिक वन प्रभाग 33229 हेक्टेयर में है। इस वन प्रभाग का एक छोर राजाजी राष्ट्रीय पार्क और पश्चिम में कलेसर वन्य जीव अभ्यारण्य और उत्तर पश्चिम में हिमाचल प्रदेश के सिरमौर सेंचुरी है। यहां वन्य जीव का खूब विचरण है। शिवालिक वन प्रभाग में मोहंड, शाकंभरी और बड़कला तीन प्रमुख रेंज हैं, जिनके अंतर्गत 13 सेक्शन हैं और 24 बीट हैं। इन सभी में कर्मचारियों की तैनाती है। अब जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को वन कर्मियों को सुरक्षा के संबंध में पुख्ता इंतजाम करने और असलहा देने की बात कही है, उससे कहीं ना कहीं वन कर्मियों को काफी लाभ मिलेगा। क्योंकि अभी तक सामाजिक वानिकी के वन कर्मियों को डंडे के सहारे ही गश्त करनी पड़ती है।
सामाजिक वानिकी के जिला वनाधिकारी रणवविजय सिंह के मुताबिक कर्मचारियों के पास एक दुनाली बंदूक है, जबकि शिवालिक के जिला वनाधिकारी आर बालाचंद्रन का कहना है कि करीब 60 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनके पास गस्त के दौरान साथ रखने के लिए असलहा मौजूद हैं।
अक्सर मिलते हैं गुलदार
एक साल पूर्व वन विभाग की तरफ से कैमरे ट्रैप लगाकर कराए गए सर्वे में 52 गुलदार भी मिले थे। इसके अलावा आए दिन वन क्षेत्र से निकलकर गुलदार आबादी की तरफ भी आ जाते हैं। चार दिन पहले ही गांव बुड्ढाखेडा पुंडीर में ग्रामीणों ने गुलदार के शावक को पीट पीटकर मार डाला था, जबकि मादा गुलदार को वन विभाग की टीम ने पिंजरा लगाकर पकड़ लिया था। इसके अलावा भी अक्सर गुलदार यहां क्षेत्र में आ जाते हैं।