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तड़पते बेजुबानों का सहारा बन रही स्नेहा और उसका परिवार

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घर पर रखे गए घायल कुत्तों को दुलारती स्नेहा, उनकी मां बबली और बहन प्राची। - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। सड़कों पर विचरण करने वाले जिन आवारा कुत्तों को वाहन चालक जाने-अनजाने में कुचलकर तड़पता छोड़ जाते हैं। उन कुत्तों को स्नेहा उठाकर घर ले आती है और इलाज कराती है। स्नेहा की इस दयालुता पर पहले परिजन नाराज होते थे, मगर अब मां, बहन और भाई भी उसके साथ हैं।
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स्नेहा वर्मा अर्थशास्त्र विषय में एमए हैं। पिता जो अब इस दुनिया में नहीं हैं कुत्तों से विशेेष लगाव रखते थे। वहीं से स्नेहा के मन में इन बेजुबानों के लिए दया भाव जागा। पिता के जाने के बाद से स्नेहा इन बेजुबानों को तड़पता नहीं देख पाती हैं। स्नेहा को जहां भी घायल और बीमार कुत्ते नजर आते हैं या कहीं से सूचना आती है वह वहां से उन्हें उठाकर घर ले आती है। इलाज में वह डॉ. हर्षित नारंग का सहारा लेती है। स्नेहा ने बताया कि डॉ. हर्षित उनके द्वारा ले जाए गए कुत्तों के इलाज अपनी ओर से फ्री दवाएं तक देते हैं। स्नेहा का मकान शहर की पॉश कॉलोनी साउथ सिटी में है। वर्तमान में दस कुत्ते स्नेहा के घर पर रहते हैं। तीन मंजिल मकान में द्वितीय तल इन्हीं जानवरों के नाम है। स्नेहा की मां बबली वर्मा, छोटी बहन प्राची वर्मा और भाई ज्वेलर दीपक वर्मा भी कुत्तों की सेवा में शामिल हैं।
नौकरी का ऑफर छोड़ा
स्नेहा मैकअप आर्टिस्ट हैं, जिसकी मुंबई और दिल्ली में खासी मांग है। स्नेहा ने बताया कि उसको दिल्ली से नौकरी का ऑफर है, मगर घर पर पाले हुए इन बेजुबानों की वजह सेज घर नहीं छोड़ पा रही है।
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स्मार्ट सिटी में हो बेजुबानों के इलाज की व्यवस्था
स्नेहा वर्मा का कहना है कि वह नगर निगम, पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों से मिले हैं। उनकी मांग है कि स्मार्ट सिटी योजना के तहत इन बेजुबानों खासकर घायल बेजुबानों के इलाज की व्यवस्था बने।

अपने घर पर कुत्तों को दुलारती स्नेहा वर्मा।- फोटो : SAHARANPUR

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