सार
सहारनपुर के भोपा क्षेत्र में सांप के डसने के बाद बुजुर्ग महिला को समय पर अस्पताल नहीं ले जाया गया। परिजन करीब छह घंटे तक झाड़-फूंक में उलझे रहे, जिसके बाद अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
भोपा क्षेत्र के शुक्रतारी गांव में सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक के चक्कर में उपचार में हुई देरी एक बुजुर्ग महिला की जान पर भारी पड़ गई। करीब छह घंटे बाद अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने महिला को मृत घोषित कर दिया।
जानकारी के अनुसार, 65 वर्षीय सुशीला मंगलवार सुबह करीब पांच बजे बारिश से बचाने के लिए छप्पर में रखी सूखी लकड़ियां दूसरी जगह रख रही थीं। इसी दौरान लकड़ियों में छिपे सांप ने उनके दाहिने हाथ की अंगुली पर काट लिया। उस समय घर पर कोई अन्य सदस्य मौजूद नहीं था। महिला ने अंगुली पर रस्सी बांधी और पड़ोसी को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद परिजनों को सूचना दी गई।
यह भी पढ़ें: UP: बिजनौर बैराज से छोड़ा गया 1.45 लाख क्यूसेक पानी, हस्तिनापुर खादर के गांवों में बढ़ी चिंता, किसान परेशान
परिजनों ने तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय महिला को झाड़-फूंक के लिए विभिन्न स्थानों पर ले जाया। करीब छह घंटे बाद उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन परिजनों ने किसी भी कानूनी कार्रवाई से इनकार कर दिया। बाद में शव का अंतिम संस्कार शुक्रताल श्मशान घाट पर कर दिया गया।
मृतका के परिवार में दो बेटियां और तीन बेटे हैं। पति का पहले ही निधन हो चुका है। घटना के बाद पूरे परिवार में शोक का माहौल है।
क्या रही सबसे बड़ी चूक? न करें ये गलतियां
इस मामले में सबसे अधिक समय झाड़-फूंक और अंधविश्वास में बीत गया। विशेषज्ञों के अनुसार, सर्पदंश की स्थिति में मरीज को बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल पहुंचाना ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है। उपचार में देरी जानलेवा साबित हो सकती है।