हादसा उस वक्त हुआ जब विमल कुमार हाईवे के कार्यों की नियमित जांच कर रहे थे। मिट्टी रोकने के लिए लगाए गए दो सीमेंट लैंटर पैनल अचानक उनके ऊपर गिर गए।
मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि पैनल में लॉक सिस्टम नहीं लगाया गया था। इसी लापरवाही के चलते हादसा हुआ।
कर्मचारियों ने पैनल को हटाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वजन अधिक होने के कारण असफल रहे। अंततः हाईड्रा मशीन से पैनल हटवाकर विमल को बाहर निकाला गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
हादसे की सूचना मिलते ही हाईवे अथॉरिटी के अधिकारी सुजीत सिंह और कंस्ट्रक्शन इंजीनियर संदीप कुमार मौके पर पहुंचे। विमल के बड़े भाई विक्की कुमार, जो वहीं सीनियर इंजीनियर हैं, वे भी मौके पर पहुंचे।
परिजन बिना किसी कानूनी प्रक्रिया या शिकायत के शव को अपने साथ ले गए। इससे हादसे की जिम्मेदारी तय नहीं हो सकी।