सहारनपुर। सांसद इमरान मसूद को कांग्रेस में प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद सहारनपुर की सियासत प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गई है। 2027 के चुनाव में जिले की सात सीटों पर भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा की सक्रियता के बीच सबसे बड़ा सवाल वोटों के ध्रुवीकरण और बिखराव का है। 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस-सपा गठबंधन के प्रदर्शन ने विधानसभा सीटों के पुराने समीकरणों को नई दिशा दिखाई थी। अब कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता और सपा के साथ सीटों को लेकर खींचतान के बीच सहारनपुर का चुनावी गणित फिर बदलता नजर आ रहा है।
जिले की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नए समीकरण आकार लेने लगे हैं। कांग्रेस ने सांसद इमरान मसूद को प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर पश्चिमी यूपी की राजनीति में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी है। इसका असर जिले की सातों विधानसभा सीटों की राजनीति पर पड़ सकता है। 2022 में जिले की सात सीटों में भाजपा ने पांच और सपा ने दो सीटें जीती थीं। नकुड़ में भाजपा की जीत महज 315 वोट से हुई थी, जबकि बेहट में सपा ने 37,880 और सहारनपुर देहात में 30,745 वोट के अंतर से जीत दर्ज की थी। यानी इन सीटों पर मुकाबले की जमीन पहले से ही अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक समूहों के बीच बंटी हुई है।
2024 लोकसभा चुनाव ने इस गणित की दूसरी तस्वीर दिखाई। इमरान मसूद ने सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस-सपा गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता। विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों में कांग्रेस को बेहट में 38,229, सहारनपुर नगर में 5,016 और सहारनपुर देहात में 44,626 वोट की बढ़त मिली। वहीं देवबंद में भाजपा को 21,051 और रामपुर मनिहारान में 1,557 वोट की बढ़त मिली। इससे साफ है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मतदाताओं के रुझान एक जैसे नहीं रहे हैं।
रणनीति के केंद्र में सपा और कांग्रेस
अब सबसे अहम सवाल सपा-कांग्रेस के रिश्ते का है। दोनों दलों के नेताओं के बीच 2027 में सीट बंटवारे को लेकर बयानबाजी सामने आ चुकी है। इमरान मसूद कांग्रेस के लिए अधिक हिस्सेदारी की बात कर चुके हैं, जबकि सपा की ओर से अपने संगठन और चुनावी आधार को लेकर अलग दावे किए गए हैं। ऐसे में लड़ाई केवल भाजपा बनाम विपक्ष नहीं रह जाती। कांग्रेस अगर अपने संगठन को मजबूत करती है और बसपा भी अपने परंपरागत सामाजिक आधार के साथ मैदान में रहती है, तो विपक्षी वोटों के विभाजन का सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है।
सामाजिक समूह को जोड़ना ही असली परीक्षा
दूसरी ओर, सपा-कांग्रेस गठबंधन बना रहता है तो सीटों का बंटवारा और उम्मीदवार चयन उतना ही अहम होगा। इसलिए 2027 में जिले की राजनीति का सवाल केवल यह नहीं होगा कि कौन सा दल कितनी सीट पर चुनाव लड़ता है। असली परीक्षा यह होगी कि कौन अपने साथ अलग-अलग सामाजिक समूहों को जोड़ पाता है और कौन विपक्षी वोटों के बिखराव को रोक पाता है। इमरान मसूद की नई जिम्मेदारी ने इस समीकरण में कांग्रेस का दांव जरूर बड़ा कर दिया है।
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फैक्ट फाइल :
2024 लोकसभा चुनाव : सांसद इमरान मसूद कांग्रेस
2022 विधानसभा चुनाव :
सहारनपुर नगर : विधायक राजीव गुंबर भाजपा
देवबंद : विधायक व राज्यमंत्री बृजेश सिंह भाजपा
नकुड़ : विधायक मुकेश चौधरी भाजपा
गंगोह : विधायक किरत चौधरी भाजपा
रामपुर मनिहारान : विधायक देवेंद्र निम भाजपा
सहारनपुर देहात : विधायक आशु मलिक, सपा
बेहट : विधायक उमर अली, सपा